सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्‍याकांड के दोषी परोरिवलन की परोल अवधि एक हफ्तेे और बढ़ाई

पिछले हफ्ते भी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन की परोल अवधि एक हफ्ते औऱ बढ़ा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्‍याकांड के दोषी परोरिवलन की परोल अवधि एक हफ्तेे और बढ़ाई

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  • मेडिकल आधार पर परोल बढ़ाने का लिया है फैसला
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह परोल का अंतिम विस्‍तार है
  • 9 नवंबर से चिकित्‍सा आधार पर है परोल पर
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन (AG Perarivalan) की परोल अवधि एक हफ्ते औऱ बढ़ा दी है. मेडिकल आधार पर परोल बढ़ाने का फैसला किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पेरारीवलन के लिए यह परोल का अंतिम विस्तार है, वह चिकित्सा आधार पर 9 नवंबर से पैरोल पर है. पिछले हफ्ते भी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन की परोल अवधि एक हफ्ते औऱ बढ़ा दी थी. याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन की परोल एक हफ्ते और बढ़ाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार (Tamilnadu Government)से कहा कि जब वह चिकित्सा जांच के लिए जाए तो पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए. 

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वहीं CBI ने SC को बताया था कि कि पेरारिवलन को रिहा करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है. यह तमिलनाडु के राज्यपाल और याचिकाकर्ता के बीच एक मुद्दा है और सीबीआई की इसमें कोई भूमिका नहीं है. जांच एजेंसी का कहना है कि पेरारिवलन को रिहा करने का फैसला राज्यपाल को लेना है. मल्टी डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी पेरारिवलन की भूमिका की जांच नहीं कर रही क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा की पुष्टि की है. सीबीआई, जो एमडीएमए का हिस्सा है, ने पेरारिवलन की मां की याचिका पर शीर्ष अदालत से नोटिस जारी करने के बाद यह हलफनामा दायर किया.

 राजीव गांधी हत्याकांड में पेरारिवलन और अन्य दोषियों की रिहाई के लिए राज्य सरकार की सिफारिश राज्यपाल के पास लंबित है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हत्यारे पेरारिवलन की दया याचिका राज्यपाल के पास दो साल से लंबित रहने पर नाराजगी जताई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं. लेकिन हम इस बात से खुश नहीं हैं कि यह सिफारिश दो साल से लंबित है. कोर्ट ने बताया कि हमें बताएं कि कानून और मामले क्या हैं जो हमें ऐसा करने की अनुमति दे सकते हैं.

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