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SC ने अफ्रीकी चीते को भारत लाने की दी अनुमति, अब नामीबिया से मंगाए जाएंगे चीते

SC ने कहा कि इसका निर्देशन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण विशेषज्ञ पैनल द्वारा किया जाएगा, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञ एम के रंजीतसिंह, देहरादून वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के निदेशक धनंजय मोहन और DIG(वन्यजीव) शामिल हैं.

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SC ने अफ्रीकी चीते को भारत लाने की दी अनुमति, अब नामीबिया से मंगाए जाएंगे चीते

सुप्रीम कोर्ट ने अफ्रीका के नामीबिया के चीता को भारत लाने की इजाजत दी.

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने अफ्रीकी चीता को भारत लाने की दी अनुमति
  2. भारत लाने के बाद किया जाएगा चीतों पर अध्ययन
  3. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी चीते को लाने पर लगाया था प्रतिबंध
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अफ्रीका के नामीबिया के चीता को ''कुन्हों'' या देश के अन्य हिस्सों में लाने की इजाजत दे दी है. कोर्ट ने इस पर एक डिलेट स्टडी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि रणजीत सिंह की एक्सपर्ट कमिटी इसकी निगरानी करेगी. आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने पहले अफ्रीकी चीता को विदेशी प्रजाति बताते हुए इसे अस्वीकार कर दिया था. SC ने मंगलवार को कहा कि नामीबिया से चीता को विस्तृत अध्ययन के बाद कुन्हो या भारत के किसी अन्य हिस्से में लाया जा सकता है.

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SC ने कहा कि इसका निर्देशन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण विशेषज्ञ पैनल द्वारा किया जाएगा, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञ एम के रंजीतसिंह, देहरादून वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के निदेशक धनंजय मोहन और DIG(वन्यजीव) शामिल हैं. साथ ही अदालत ने भारत में चीता पर विशेषज्ञ पैनल से हर चार महीने में रिपोर्ट मांगी है. इससे पहले MoEF ने 2010 में नामीबिया से चीता लाने की योजना बनाई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में रोक लगा दी थी.


पिछले साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि  वह अफ्रीकी चीतों को नामीबिया से भारत लाकर मध्यप्रदेश स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ नहीं है. न्यायालय ने कहा था कि बाघ-चीते के बीच टकराव के कोई सबूत रिकॉर्ड में नहीं हैं. न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने पशुओं को अन्यत्र स्थानों पर बसाने के मामले में न्यायालय की मदद कर रहे वकील से इस बारे में उनका दष्टिकोण जानना चाहा था. 

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ वकील वसीम कादरी ने पीठ को सूचित किया कि अभयारण्य में बाघ और तेंदुए जैसे कई जानवर रहते हैं. इस पर पीठ ने कहा कि उसे कैसे पता चलेगा कि चीता यहां के माहौल में जीवित रह सकेगा. शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की इस पहल पर सहमति व्यक्त की और कहा कि वह अफ्रीकी चीतों को मध्य प्रदेश में बसाने का प्रयोग करने की नीति के खिलाफ नहीं है.

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इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही कादरी ने कहा था कि अमिक्स की यह टिप्पणी पूरी तरह गलत है कि यह क्षेत्र चीते के रहने की पसंदीदा जगह नहीं है. प्राधिकरण ने कहा कि चीतों को बसाने के लिए व्यावहारिक पाये गये सभी स्थानों का फिर से आकलन किया जायेगा और इन्हें बसाने से पहले इनके लिये जरूरी उपायों के लिए कार्ययोजना तैयार की जायेगी. प्राधिकरण ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में चीते फिर से बसाने के बारे में पत्र लिखा है.

प्राधिकरण ने 22 फरवरी 2019 को शीर्ष अदालत से कहा था कि नामीबिया से भारत में बसाए जाने वाले अफ्रीकी चीतों को मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य में रखा जायेगा. भारत में अंतिम धब्बेदार चीते की 1947 में मृत्यु हो गयी थी और 1952 में इस वन्यजीव को देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था.



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