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CBI मामला: DSP बस्सी के ट्रांसफर पर अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को SC का नोटिस, छह हफ्ते में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बस्सी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की. याचिका में एके बस्सी ने दावा किया है कि उनका तबादला दुर्भावना से प्रेरित है और इससे जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित होगी.

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CBI मामला:  DSP बस्सी के ट्रांसफर पर अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव  को SC का नोटिस, छह हफ्ते में मांगा जवाब

सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव. (फाइल तस्वीर)

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने की CBI डीएसपी की याचिका पर सुनवाई
  2. अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को दिया नोटिस
  3. कहा- छह हफ्ते में दें नोटिस का जवाब
नई दिल्ली:

सीबीआई (CBI) के डीएसपी जय कुमार बस्सी (AK Bassi) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव (Nageswara Rao) को नोटिस जारी किया है. नोटिस का छह हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा गया है. डीएसपी बस्सी ने अपने पोर्ट ब्लेयर हुए तबादले को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने बस्सी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की. याचिका में एके बस्सी ने दावा किया है कि उनका तबादला दुर्भावना से प्रेरित है और इससे जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित होगी. जांच एजेंसी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज प्राथमिकी की जांच करने वाले एके बस्सी ने आरोप लगाया गया है कि वह जांच एजेंसी के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव के शोषण का शिकार हैं.

साथ ही बस्सी ने याचिका में दावा किया था कि जांच एजेंसी के भीतर कुछ तत्वों का प्रतिनिधित्व कर रहे नागेश्वर राव नहीं चाहते कि राकेश अस्थाना की प्राथमिकी के मामले में याचिकाकर्ता स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच करे.
जांच एजेंसी के इस अधिकारी ने याचिका में कहा था कि नागेश्वर राव ने ही 24 अक्टूबर, 2018 को भी उनका तबादला पोर्ट ब्लेयर किया था और एक बार फिर वह आलोक वर्मा प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले की अनदेखी करते हुये उन्हें अंडमान निकोबार भेजा. बस्सी ने अपनी याचिका में जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के 11 जनवरी के तबादला आदेश को चुनौती देते हुए कहा है कि इससे जांच एजेंसी के पूर्व निदेशक आलोक कुमार वर्मा के मामले में न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन होता है.


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शीर्ष अदालत के 8 जनवरी के फैसले के बाद हालांकि आलोक वर्मा को जांच एजेंसी के निदेशक पद पर बहाल कर दिया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने भ्रष्टाचार और जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही की वजह से पद से हटा दिया था. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में बस्सी सहित उन सभी अधिकारियों, जिनका वर्मा को अवकाश पर भेजने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद अलग-अलग स्थानों पर तबादला किया गया था, से कहा था कि वे अपने तबादलों के मामले में उचित मंच से संपर्क करें. इस अधिकारी के अनुसार वर्मा की बहाली के बाद 9 जनवरी को उन्होंने जांच एजेंसी के निदेशक को एक प्रतिवेदन दिया था जिस पर उनका वापस दिल्ली तबादला कर दिया गया था.

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बस्सी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह आदेश ऐसे अधिकारी ने दिया है जो ऐसे आदेश देने के लिए सक्षम नहीं है. याचिका में कहा गया है कि इस आदेश का मकसद उनका शोषण करना है और यह राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर, 2018 को दर्ज प्राथमिकी की जांच को अनुचित तरीके से प्रभावित करने वाला है. बस्सी ने याचिका में यह भी कहा है कि वह अस्थाना से संबंधित प्राथमिकी की जांच करने वाले जांच दल या किसी अन्य मामले की जांच कर रहे ब्यूरो के दल का हिस्सा बनने का दावा नहीं कर रहे हैं.

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