यौन उत्पीड़न मामले में जमानत के लिए गाइडलाइन बनाने की याचिका पर फैसला सुरक्षित

नौ महिला वकीलों ने एक मामले में जमानत की शर्त को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, कहा गया है कि इस तरह के आदेश महिलाओं को एक वस्तु की तरह दिखाते हैं

यौन उत्पीड़न मामले में जमानत के लिए गाइडलाइन बनाने की याचिका पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट.

नई दिल्ली:

यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) मामले में जमानत देने के लिए गाइडलाइन तैयार करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फैसला सुरक्षित रखा है. दरअसल 30 जुलाई को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने छेड़छाड़ के आरोपी को सशर्त जमानत दी थी. इसमें शर्त यह है कि आरोपी रक्षाबंधन पर पीड़ित के घर जाकर उससे राखी बंधवाएगा और रक्षा का वचन देगा. नौ महिला वकीलों ने जमानत की शर्त को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. दलीलों में कहा गया है कि इस तरह के आदेश महिलाओं को एक वस्तु की तरह दिखाते हैं. 

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल कर कहा है कि न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए. इससे यौन हिंसा से जुड़े मामलों में ज्यादा संतुलित और सशक्त दृष्टिकोण अपनाया जा सकेगा.  AG ने कहा कि कभी कोई महिला भारत की मुख्य न्यायाधीश नहीं रही है. सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की क्षमता है लेकिन सिर्फ दो ही महिला जज हैं. AG ने विभिन्न हाईकोर्टों व ट्रिब्यूनल की जानकारी भी दी है.

पीड़िता से राखी बंधाने के लिए यौन उत्पीड़न के आरोपी को जमानत देने के मामले में ये लिखित दलीलें दी गई हैं. पिछली सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने आरोपियों को पीड़िता से राखी बंधवाने के लिए कहने के मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर टिप्पणी की थी कि इस नाटक की निंदा की जानी चाहिए और ऐसा लगता है कि अदालत अपने दायरे से बाहर चली गई है. जजों को शिक्षित करने की जरूरत है. जज भर्ती परीक्षा में लिंग संवेदीकरण का एक हिस्सा होना चाहिए. जजों,  राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी और राज्य न्यायिक अकादमी के लिए परीक्षा में लैंगिक संवेदनशीलता पर कार्यक्रम होना चाहिए. जब तक संवेदनशीलता का संबंध है, लिंग संवेदीकरण और शिकायत निवारण समिति सुप्रीम कोर्ट में है. जिला और अधीनस्थों अदालतों के अलावा  हाईकोर्ट में भी लिंग संवेदीकरण के बारे में लेक्चर दिए जाने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने एजी, याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं से इस मुद्दे पर नोट प्रसारित करने को कहा था.  पहले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की मदद मांगी थी.  

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मध्यप्रदेश : छेड़छाड़ के आरोपी को हाई कोर्ट ने सशर्त जमानत दी, शर्त जानकर रह जाएंगे हैरान

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आरोपी विक्रम बागरी उज्जैन जेल में बंद था. अप्रैल में पड़ोस में रहने वाली महिला के घर में घुसकर छेड़छाड़ के आरोप में जेल में बंद विक्रम बागरी ने इंदौर में जमानत याचिका दायर की थी. सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद जस्टिस रोहित आर्या की सिंगल बेंच ने आरोपी को 50 हजार के मुचलके के साथ जमानत दी. उसमें शर्त यह भी थी कि वह 3 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन 11 बजे अपनी पत्नी को साथ लेकर पीड़ित के घर राखी और मिठाई लेकर जाएगा और पीड़िता से आग्रह करेगा कि वह उसे भाई की तरह राखी बांधे. इसी के साथ विक्रम पीड़ित की रक्षा का वचन देकर भाई के रूप में परम्परा अनुसार उसे 11 हजार रुपये देगा और पीड़िता के बेटे को भी 5 हजार रुपये कपड़े और मिठाई के लिए देगा. इतना ही नहीं, इस सबकी तस्वीरें रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश भी कोर्ट ने दिए थे. कहा गया कि आरोपी को लिखित में ये भी देना होगा कि वह कोविड-19 को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग के साथ समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करेगा.