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दीपावली पर लाइसेंस रखने वाले दुकानदार ही बेच सकेंगे पटाखे, ऑनलाइन बेचने पर अवमानना : सुप्रीम कोर्ट

28 अगस्त को जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने दलील पूरी होने के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

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दीपावली पर लाइसेंस रखने वाले दुकानदार ही बेच सकेंगे पटाखे, ऑनलाइन बेचने पर अवमानना : सुप्रीम कोर्ट

पिछली बार भी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पटाखों पर बैन लगा दिया था.

खास बातें

  1. वायु प्रदूषण को लेकर दी गई थी याचिका
  2. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण कर रहे हैं सुनवाई
  3. केंद्र सरकार ने किया है प्रतिबंध का विरोध
नई दिल्ली:

देशभर में पटाखों की बिक्री और पटाखे चलाने पर रोक की याचिका पर फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य
सरकारों को निर्देश जारी किए हैं जिसमें कम एमिशन वाले पटाखों को ही इजाजत मिली है और सिर्फ लाइसेंसधारी वाले ही पटाखे बेचे जा सकेंगे. इसके साथ ही ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है. कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन बेचने पर अवमानना माना जाएगा.  इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पटाखों की बिक्री से जुड़े ये निर्देश सभी त्योहारों तथा शादियों पर भी लागू होंगे. दीवाली के अवसर पर पटाखे रात को 8 बजे से 10 बजे के बीच ही चलाए जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह समयसीमा पूरे देश पर लागू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, इस आदेश पर अमल करने के लिए हर इलाके का SHO जवाबदेह होगा, और अगर आदेश का पालन नहीं हुआ, तो SHO को निजी तौर पर कोर्ट की अवमानना का दोषी माना जाएगा.

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आपको बता दें कि 28 अगस्त को जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने दलील पूरी होने के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.  इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने देशभर में पटाखों की बिक्री पर बैन का विरोध किया. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-पटाखों के उत्पादन को लेकर नियम बनाना बेहतर कदम है. एल्युमिनियम और बेरियम जैसी सामग्री का इस्तेमाल रोकना सही होगा. तमिलनाडु सरकार, पटाखा उत्पादकों और विक्रेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- बिना किसी ठोस वैज्ञानिक रिसर्च के कोर्ट ने पिछले  साल दिल्ली में पटाखों की बिक्री रोक दी थी. इससे लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ. प्रदूषण के लिए पटाखों से ज्यादा कई अन्य चीजें जिम्मेदार हैं.

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इस मामले में पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा था 'क्या हमें समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और प्रदूषण में योगदान देने वाली हर चीज पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या अस्थायी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और केवल पटाखों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए?' सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी गौर किया कि वायु प्रदूषण शिशुओं के लिए बेहद खतरनाक है और जहरीले पटाखे जलाए जाने से हवा की विषाक्तता बढ़ जाती है.

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