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जानें सुप्रीम कोर्ट भी आजकल किस बात से है परेशान, सफाई में कहना पड़ा- कोर्ट आकर देख लें

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि आरोप लगाने वाले एक दिन सुप्रीम कोर्ट आएं और देखें कि कितने मामलों में कोर्ट सरकार को घेरकर नागरिकों के पक्ष में फैसले देता है.

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जानें सुप्रीम कोर्ट भी आजकल किस बात से है परेशान, सफाई में कहना पड़ा- कोर्ट आकर देख लें

सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट पर लगे आरोप

खास बातें

  1. सरकार समर्थक होने के आरोपों पर कही बात
  2. सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी करते हैं कमेंट
  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरोप लगाने वाले कोर्ट आकर देख लें
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऊपर सरकार समर्थक होने के आरोपों का खंडन किया है. कोर्ट ने सोशल मीडिया पर आने वाली टिप्पणियों पर चिंता जताई है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि आरोप लगाने वाले एक दिन सुप्रीम कोर्ट आएं और देखें कि कितने मामलों में कोर्ट सरकार को घेरकर नागरिकों के पक्ष में फैसले देता है. हमने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष को टीवी पर सुना कि सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जज सरकार समर्थक हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि ट्वीट के नाम पर हर तरह की टिप्पणियां व अपशब्द किए जाते हैं. जो भी सुनवाई के दौरान हम बोलते हैं या टिप्पणी करते हैं, सब ट्विटर पर आ जाता है.

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दरसअल, यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने बुलंदशहर रेप मामले में यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान की टिप्पणी पर सुनवाई के दौरान की. इस दौरान एमिक्स हरीश साल्वे ने कहा कि ट्विटर पर अपशब्दों को देखते हुए उन्होंने ट्विटर अकाउंट को डिलीट कर दिया. 

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दरअसल, बुलंदशहर गैंगरेप मामले में आजम खान की टिप्पणी को लेकर सुनवाई हो रही थी. अब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ तय करेगी कि राइट टू स्पीच के नाम पर आपराधिक मामलों में क्या सरकार के मंत्री या जनप्रतिनिधि पॉलिसी और विधान के विपरीत बयान दे सकते हैं?  सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने मामले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा है. इससे पहले कोर्ट से आज़म ने बिना शर्त माफ़ी मांग ली थी और कोर्ट ने माफ़ीनामे को स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन कोर्ट ने कहा था कि राइट टू स्पीच के नाम पर क्या आपराधिक मामलों में क्या सरकार के मंत्री या जनप्रतिनिधि पॉलिसी और विधान के विपरीत बयान दे सकते हैं?  सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी हरीश साल्वे ने कहा कि मिनिस्टर संविधान के प्रति जिम्मेदार है और वह सरकार की पॉलिसी और विधान के खिलाफ बयान नहीं दे सकता.


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