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मुंबई की बारिश की वजह से नहीं हो पाया रेप पीड़ित गर्भवती का मेडिकल टेस्ट, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

बीते 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़ित गर्भवती लड़की के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए सोमवार को एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया था.

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मुंबई की बारिश की वजह से नहीं हो पाया रेप पीड़ित गर्भवती का मेडिकल टेस्ट, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट में बारिश की वजह से सुनवाई टली

खास बातें

  1. 28 अगस्त को रेप पीड़ित गर्भवती के लिए मेडिकल बोर्ड गठित
  2. बारिश की वजह से नहीं हो पाया मेडिकल टेस्ट
  3. इस मामले में अब 5 सितंबर को होगी सुनवाई
नई दिल्ली: मुंबई में हुई बारिश के असर के चलते मेडिकल बोर्ड 13 साल की रेप पीड़ित का मेडिकल परीक्षण नहीं कर पाया. कोर्ट ने मुंबई स्थित सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड को गर्भपात के लिए परीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा था. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि बरसात के चलते बच्ची का मेडिकल परीक्षण नहीं हो पाया. ये परीक्षण दो सितंबर को किया जाएगा. अब कोर्ट इस मामले पर पांच सितंबर को सुनवाई करेगा.

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बच्ची ने 30 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने की अर्जी दाखिल की है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में पुणे के अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर 20 साल की महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी। उसे करीब 25 हफ्ते का गर्भ है और बच्चे की खोपड़ी नहीं है। 

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बीते 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़ित गर्भवती लड़की के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए सोमवार को एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया था. यह नाबालिग लड़की 30 सप्ताह की गर्भवती है. जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागे श्वर राव की पीठ ने निर्देश देते हुए कहा था कि इस नाबालिग लड़की के स्वास्थ्य की जांच के लिए मुंबई स्थित सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए. पीठ ने इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए स्थगित करते हुए कहा था कि यह बोर्ड याचिकाकर्ता की बेटी की स्थिति और गर्भपात के बारे में सलाह देगा. 

गौरतलब है कि 20 सप्ताह के बाद गर्भपात पर प्रतिबंध है. पीठ ने इसके साथ ही केंद्र को नोटिस जारी किया. साथ ही इसकी एक प्रति सॉलिसीटर जनरल के पास भेजने का भी निर्देश दिया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को ही एक 10 वर्षीय गर्भवती नाबालिग को 32 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इस बीच, कोर्ट ने बगैर खोपड़ी वाले 24 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति के लिए दायर याचिका पर उसके स्वास्थ्य की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया. जस्टिस बोबड़े और जस्टिस राव की बेंच ने पुणे स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज में मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया जो 20 वर्षीय महिला का परीक्षण करके अपनी रिपोर्ट देगी.


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