असम में NRCसे बाहर 10 फीसदी लोगों का फिर से सत्यापन करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने NRC से बाहर 40 लाख दावेदारों को अपनी विरासत को बदलने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की अनुमति पर सवाल उठाए

असम में NRCसे बाहर 10 फीसदी लोगों का फिर से सत्यापन करने का आदेश

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  • कोर्ट ने NRC के लिए दावों व आपत्तियों की तारीख में बदलाव किया
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सैम्पल स्तर पर रीवेरीफिकेशन करेंगे
  • सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- विरासत बदलने की अनुमति देने का क्या परिणाम होगा?
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मसौदे से बाहर रखे गए 10 प्रतिशत लोगों के पुन:सत्यापन का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने NRC के लिए दावों व आपत्तियों की तारीख में बदलाव किया है. अब 30 अगस्त की जगह पांच सितंबर को सुनवाई होगी.  

सुप्रीम कोर्ट ने SOP के लिए केंद्र के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने NRC से बाहर 40 लाख दावेदारों को अपनी विरासत को बदलने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की अनुमति पर भी सवाल उठाए हैं.

कोर्ट  ने NRC कोआर्डिनेटर प्रतीक हजेला से विरासत, इसके फायदे और नुकसान में परिवर्तन के प्रभाव पर एक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा. कोर्ट  ने कहा कि जिस क्षण आप विरासत बदलते हैं, फैमिली ट्री बदल जाएगा और पूरी प्रक्रिया को फिर से करना होगा. एक तरफ केंद्र कहता है कि फैमिली ट्री बरकरार रहेगा. दूसरी ओर केंद्र कहता है कि नए दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं, क्या यह विपरीत नहीं है?

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रतीक हजेला से कहा कि आप हमें ये बताएं कि अगर लीगेसी (लीगेसी को चेंज करना) की अनुमति देते हैं तो क्या परिणाम होगा? इसके फायदे क्या होंगे? बंद लिफाफे में कोर्ट को दें. पांच सितंबर को हजेला को रिपोर्ट कोर्ट में देनी है. आपत्ति दर्ज करने की शुरुआत 30 अगस्त से होनी है, उसको बढ़ाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने हजेला से कहा कि 10 फीसदी डिस्ट्रिक्ट के हिसाब से डाटा एकत्रित करने का प्रोसेस क्या होगा, इसको लेकर भी हजेला को रिपोर्ट दाखिल करनी है. पांच सितंबर को अगली सुनवाई होगी.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा  हम NRC की विश्वसनीयता को जांचने के लिए सैंपल सर्वे कराना चाहते हैं. यह वैरीफिकेशन सर्वे दस फीसदी लोगों का हो जिनकी जांच की गई है. यह सैंपल सर्वे दावों और आपत्तियों के साथ-साथ चलेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि किसी व्यक्ति को अपनी फैमिली ट्री के ब्योरे को देने के लिए दूसरा या तीसरा मौका देने में हर्ज क्या है? इस तथ्य को कैसे दुरुस्त किया जाएगा कि एक व्यक्ति की फैमिली ट्री बनाई गई लेकिन उस व्यक्ति को बाहर कर दिया गया.

NRC कोआर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने कहा कि सैंपल सर्वे के लिए 550 अफसरों की जरूरत होगी. सुप्रीम कोर्ट ने हजेला से पूछा आपको SOP बनाने में कितना समय लगेगा? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा इसको कब शुरू किया जाए. इसको लेकर क्या कोई साफ्टवेयर डेवलप करने की जरूरत है?
 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सैम्पल स्तर पर रीवेरीफिकेशन करेंगे. कोर्ट ने पूछा- फैमिली ट्री में बदलाव को दावे का आधार माना जाएगा या नहीं? फैमिली ट्री तो एक डिवाइस है जिसके जरिए आप किसी की वंशावली जानते हैं.

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कोर्ट ने NRC में नाम दर्ज कराने का दावा  करने की शुरुआत 30 अगस्त की बजाय 7 सितंबर से करने का सुझाव दिया.  कोर्ट अगले हफ्ते इस मामले में फैमिली ट्री में बदलाव पर उठने वाले  कानूनी पहलुओं पर सुनवाई करेगा. NRC में दावा करने पर भी अपनी नागरिकता साबित करने में नाकाम रहने वाले लोगों को क्या दूसरे दस्तावेज़ों के आधार पर मौका दिया जाए, इस पर एक पक्षकार को आपत्ति थी. कोर्ट ने कहा कि ज़्यादातर लोग निरक्षर हैं. हो सकता है उन्होंने दस्तावेज संभालकर न रखे हों. वकील ने कहा कि सरहद पार करने में माहिर हैं पर बाकी जगह निरक्षर कहे जाते हैं.

असम में NRC के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने SOP पर विभिन्न हितधारकों के विचार मांगे थे. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि SOP को लेकर किसी भी राजनीतिक दल के सुझाव नहीं सुने जाएंगे.  सुप्रीम कोर्ट ने ऑल असम स्टूडेंट यूनियन और ऑल असम माइनारिटी स्टूडेंट यूनियन और जमायत-ए उलेमा हिंद से SOP पर उनके विचार मांगे. केंद्र सरकार ने कहा था इसे 25 अगस्त तक दाखिल करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने प्रतीक हजेला से असम के हर जिले में NRC से बाहर हुए लोगों का ब्यौरा मांगा था. हजेला यह ब्यौरा सील कवर में दाखिल करेंगे.

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VIDEO : एनआरसी से बाहर हुए लोगों का दर्द

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 30 अगस्त से दावे और आपत्तियां शुरू होंगी. कोर्ट ने हजेला से कहा कि वे NRC मसौदा की प्रतियां पंचायत ऑफिस और अन्य दफ्तरों में रखें ताकि लोग इसे देख सकें.