कमलनाथ और कांग्रेस की दलीलें खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्यपाल, मुख्यमंत्री से बहुमत दिखाने को कह सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता कमलनाथ और मध्य प्रदेश की कांग्रेस की उस दलील को भी खारिज कर दी जिसमें उनका कहना कि राज्यपाल चल रही विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं कह सकते.

कमलनाथ और कांग्रेस की दलीलें खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्यपाल, मुख्यमंत्री से बहुमत दिखाने को कह सकते हैं

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि राज्यपाल के सीएम को बहुमत दिखाने के लिए कहने में कोई बाधा नहीं है अगर उनके पास ऐसा करने के लिए अच्छे कारण हैं तो. राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग चल रही विधानसभा में भी कर सकते हैं.  सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता  कमलनाथ और मध्य प्रदेश की कांग्रेस की उस दलील को भी खारिज कर दी जिसमें उनका कहना कि राज्यपाल चल रही विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं कह सकते. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि मध्य प्रदेश में राज्यपाल का फ्लोर टेस्ट का आदेश बिलकुल सही था. कोर्ट ने कांग्रेस की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी के इस तर्क को मंजूर नहीं किया कि राज्यपाल आदेश पारित नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल स्वयं कोई निर्णय नहीं ले रहे हैं. राज्यपाल एक फ्लोर टेस्ट बुला रहे हैं.  सदन में दो तौर-तरीके होते हैं- अविश्वास प्रस्ताव या फ्लोर टेस्ट. फ्लोर टेस्ट क्यों जरूरी है, इस पर एसआर बोम्मई मामले के बाद से कोई फैसला नहीं हुआ है. इसमें राज्यपाल ने अनुच्छेद 356 के तहत शक्ति का प्रयोग किया है. बोम्मई ने दिखाया है कि विश्वास मत को एक विधानसभा में रखा जा सकता है.  इसमें संवैधानिक कानून और राज्यपाल की शक्तियों पर एक विस्तृत निर्णय दिया है. 

मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट विस्तृत ने आदेश जारी किया है. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने सरकार बना ली है. हालांकि 19 मार्च को अंतरिम आदेश जारी करते हुए  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 20 मार्च को शाम पांच बजे फ्लोर टेस्ट कराया जाए. राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी और कहा था कि 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और सरकार अल्पमत में है लिहाजा फ्लोर टेस्ट कराया जाए.  सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के स्पीकर को सुझाव दिया है कि क्या वह बागी एमएलए से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात करेंगे. 

कोर्ट इसके लिए एक ऑब्जर्वर नियुक्त कर सकता है.  हालांकि स्पीकर की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस सुझाव को खारिज कर दिया था.  दो दिन की लंबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला दिया था कि विधानसभा में 20 मार्च को शाम के वक्त फ्लोर टेस्ट कराया जाए. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि मीटिंग का एक सूत्री एजेंडा फ्लोर टेस्ट होगा. इसके लिए जो वोटिंग होगी वह हाथ उठाकर होगी. विधानसभा की कार्यवाही की विडियो रेकॉर्डिंग की जाएगी. संबंधित अथॉरिटी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि फ्लोर टेस्ट के दौरान कानून व्यवस्था कायम रहेगी.   राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया गया था कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि बागी विधायकों को आने से न रोका जाए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए.  

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