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सुप्नीम कोर्ट ने जेल की सजा के खिलाफ कर्णन की याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को उच्चतम न्यायालय से एक और झटका लगा है. शीर्ष न्यायालय ने उनकी उस याचिका को सूचीबद्ध करने और सुनवाई करने से इंकार कर दिया है.

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सुप्नीम कोर्ट ने जेल की सजा के खिलाफ कर्णन की याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

न्यायालय की अवमानना के मामले में न्यायमूर्ति कर्णन को 6 महीने की सजा सुनाई गई है (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को उच्चतम न्यायालय से एक और झटका लगा है. शीर्ष न्यायालय ने उनकी उस याचिका को सूचीबद्ध करने और सुनवाई करने से इंकार कर दिया है जिसमें न्यायालय की अवमानना के मामले में उन्हें सुनाई गई छह महीने की जेल की सजा को उन्होंने वापस लेने का अनुरोध किया था.

शीर्ष न्यायालय की रजिस्ट्री ने कहा है कि याचिका विचारणीय नहीं है. दायर नई याचिकाओं को सूचीबद्ध करने वाले शीर्ष न्यायालय के एक रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा रिट याचिका विचारणीय नहीं है. इसलिए, उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के प्रावधानों के तहत पंजीकरण के लिए मौजूदा रिट याचिका को स्वीकार करने में उन्हें कोई वाजिब कारण नहीं दिखता.

शीर्ष न्यायालय का आदेश जारी होने के तीन बाद उसे न्यायमूर्ति कर्णन के वकीलों को भेजा गया. कर्णन की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है. न्यायाधीश ने अपने वकीलों के जरिए शीर्ष न्यायालय का रुख कर सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा नौ मई को जारी किए गए आदेश को वापस लेने की मांग की थी. पीठ ने उन्हें न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया था और उन्हें छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी. साथ ही, पश्चिम बंगाल पुलिस को उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया था.

वहीं, 12 मई को न्यायमूर्ति कर्णन ने राहत के लिए शीर्ष न्यायालय का रुख करते हुए कहा था कि ना तो उच्च न्यायालय, ना ही इनके न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय के अधीनस्थ हैं. इस बीच, न्यायमूर्ति कर्णन का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने दावा किया है कि राष्ट्रपति को एक ज्ञापन देकर उच्चतम न्यायालय के उस आदेश को स्थगित करने की मांग की गई थी, जिसके जरिए उन्हें अवमानना के मामले में छह महीने की कैद की सजा सुनाई गई थी. 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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