सुप्रीम कोर्ट ने छह लोगों को सजा-ए-मौत का अपना फैसला 10 साल बाद पलटा

पुणे जिले में 2006 में हुए गैंगरेप और एक नाबालिग बच्चे सहित पांच लोगों की हत्या के मामले में छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने छह लोगों को सजा-ए-मौत का अपना फैसला 10 साल बाद पलटा

सुप्रीम कोर्ट.

खास बातें

  • एक गवाह ने चार अन्य लोगों को पहचाना था लेकिन उनकी जांच नहीं हुई
  • जेल काट चुके लोगों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की आगे जांच के आदेश दिए
नई दिल्ली:

सजा-ए-मौत का अपना ही फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल बाद पलट दिया. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जेल काट चुके लोगों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया. पुणे जिले में 2006 में हुए गैंगरेप और एक नाबालिग बच्चे सहित पांच लोगों की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने सभी छह दोषियों को सजा-ए-मौत सुनाई थी.

मुंबई हाईकोर्ट ने तीन को मौत की सजा बरकरार रखी और तीन को उम्रकैद दी. दोषियों में अंकुश मारुति शिंदे, राज्य अप्पा शिंदे, बापू अप्पा शिंदे, अंबादास लक्ष्मण शिंदे, राजू महासू शिंदे और सूर्या उर्फ सुरेश शामिल हैं.

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बाद में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरिजीत पसायत और जस्टिस मुकुंदकम शर्मा की अगुआई वाली बेंच ने 2009 में सभी छह दोषियों की मौत की को मंजूरी दी थी. इसके बाद 2010 से रिव्यू याचिका पर कई बार अलग-अलग जजों की बेंच ने सुनवाई की. अपना सेवाकाल पूरा होने के दो दिन पहले जस्टिस एके सीकरी ने रिव्यू याचिका पर फैसला सुनाया.

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की आगे जांच के आदेश भी दिए हैं. साथ ही महाराष्ट्र के चीफ सेक्रेट्री से कहा है कि उन दोषी अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें जो अभी सेवा में हैं. कोर्ट ने कहा है कि एक गवाह ने चार अन्य लोगों को पहचाना था लेकिन उनकी कभी जांच नहीं हुई. यह एक गंभीर चूक है.

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कोर्ट ने कहा कि आरोपी गरीब और खानाबदोश जनजाति के हैं. उन्हें 16 साल यातना भुगतनी पड़ी और उनके बेशकीमती साल जेल में गुजरे.

 
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