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बोफोर्स मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 4,500 दिन की देरी के चलते CBI की दोबारा केस खोलने की याचिका खारिज कर दी

सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स घोटाला मामले में हिन्दुजा बंधुओं समेत सभी आरोपियों को आरोप मुक्त करने वाले हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी.

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बोफोर्स मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 4,500 दिन की देरी के चलते CBI की दोबारा केस खोलने की याचिका खारिज कर दी

बोफोर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका खारिज की

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स घोटाला मामले में हिन्दुजा बंधुओं समेत सभी आरोपियों को आरोप मुक्त करने वाले हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बोफोर्स मामले में उच्च न्यायालय द्वारा हिन्दुजा बंधुओं को आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने में हुई देरी के संबंध में सीबीआई ने जो आधार बताए हैं उससे वह संतुष्ट नहीं है. बोफोर्स केस में सीबीआई की 13 साल बाद हिदुजा बंधुओं के खिलाफ अपील को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया. बता दें कि 31 मई 2005 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को 13 साल बाद सीबीआई ने दी चुनौती थी.  4522 दिनों की देरी की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया.  

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अजय अग्रवाल वाली याचिका कोर्ट में चल रही है. सीबीआई उसमें पक्षकार है, उसमें सीबीआई अपना पक्ष रख सकती है. सीबीआई की ओर से AG के के वेणुगोपाल ने अजय अग्रवाल की याचिका के साथ जोडने का आग्रह किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया. बोफोर्स कांड में हिंदुजा बंधुओं को आरोपमुक्त करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ 13 साल बाद दायर सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस के एम जोसेफ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की  बेंच सीबीआई की अपील पर सुनवाई की. 

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दरअसल सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2004 के फैसले के खिलाफ इसी साल 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. इसमें हाईकोर्ट ने बोफोर्स घोटाले में हिंदुजा बंधुओं श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाशचंद के खिलाफ सभी आरोपों को रद्द कर दिया था. फरवरी में सीबीआई ने अमेरिका की एक निजी जासूसी फर्म फेयरफैक्स के अध्यक्ष माइकल हेर्शमैन के टेलीविजन को दिए इंटरव्यू का हवाला दिया है. 

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माइकल हर्षमैन ने पिछले साल अक्टूबर में एक टीवी साक्षात्कार में दावा किया था कि कुछ अमीर भारतीयों द्वारा मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन की जांच के दौरान, उन्हें यह संकेत मिला कि बोफोर्स ने बैंकों के माध्यम से रिश्वत का भुगतान किया था. हर्षमैन ने बोफोर्स मामले में भारतीय एजेंसियों की गवाही देने और उनकी सहायता करने की भी पेशकश की. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने मामले में लंबी देरी के कारण अपील दाखिल ना करने को कहा था. 

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सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत निर्धारित 90 दिनों की समय सीमा के बाद ये अपील दायर की गई है. सीबीआई के अपील दायर करने के बाद करीब 9 महीने बाद यह मामला सुनवाई के लिए आया. 

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