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सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की रहस्यमय मौत को गंभीर मुद्दा बताया, महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई करने वाले सीबीआई जज बीएच लोया की रहस्यमय मौत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई शुरू

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सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की रहस्यमय मौत को गंभीर मुद्दा बताया, महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

सीबीआई जज बीएच लोया की रहस्यमय मौत की जांच की मांग की याचिका पर सु्प्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है.

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के पत्रकार बंधुराज संभाजी लोने की याचिका
  2. कोर्ट ने कहा, मामले में द्विपक्षीय सुनवाई की जरूरत
  3. मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी
नई दिल्ली: सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ ट्रायल के जज बीएच लोया की मौत की जांच के मामले में महाराष्ट्र सरकार के वकील से राज्य सरकार से निर्देश लाने को कहा है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बीएच लोया की कथित तौर पर रहस्यमय हालात में हुई मौत को सुप्रीम कोर्ट ने आज एक “गंभीर मुद्दा’’ बताया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा. कोर्ट सोमवार को मामले की सुनवाई करेगा.

महाराष्ट्र के एक पत्रकार बंधुराज संभाजी लोने ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई को तैयार हो गया है. गौरतलब है कि जज लोया की मौत पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है.

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उच्चतम न्यायालय ने  कहा कि “इस मामले में एक पक्षीय सुनवाई की बजाए द्विपक्षीय सुनवाई की जरूरत है.” न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायामूर्ति एमएम शांतानागौदर की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के अधिवक्ता निशांत आर कटनेश्वरकर को 15 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है.

सुनवाई की शुरुआत में ‘बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन’ का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि उच्च न्यायालय इस पर सुनवाई कर रहा है और उच्चतम न्यायालय को याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए. दवे ने कहा, “बंबई उच्च न्यायालय को मामले की जानकारी है और मेरे विचार से उच्चतम न्यायालय को मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. अगर न्यायालय सुनवाई करता है तो उच्च न्यायालय के समक्ष उलझन खड़ी हो सकती है.”

याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र के पत्रकार बीआर लोन की ओर से पक्ष रख रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्हें भी बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन से निर्देश हैं कि इस मामले को उच्चतम न्यायालय द्वारा नहीं सुना जाना चाहिए. पीठ ने कहा कि वह याचिकाओं पर गौर करने के साथ ही उठाई जा रही आपत्तियों पर भी विचार करेगी.

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याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला का पक्ष रख रहे अधिवक्ता वरींदर कुमार शर्मा ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें एक दिसबंर 2014 को एक न्यायाधीश की रहस्यमय परीस्थितियों में मौत हो गई जिसकी जांच होनी चाहिए. लोया की एक दिसंबर, 2014 को दिल का दौरा पड़ने से नागपुर में मौत हो गई थी.

पीठ ने कटनेश्वरकर को सरकार से निर्देश लेने के साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायाधीश लोया की मौत से संबंधित दस्तावेजों को दाखिल करने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को तय की गई है.

दरअसल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने कथित रूप से हैदराबाद से अगवा किया. आरोप लगाया गया कि दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला गया. शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया. उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था.

VIDEO : जज की मौत के मामले की सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया. शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश न होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया. फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया ने की और दिसंबर 2014 में नागपुर  में उनकी मौत हो गई.
(इनपुट भाषा से भी)


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