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मोबाइल और बैंक से आधार लिंक करने के sms में डेडलाइन बताई जाए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा है कि अगर डेडलाइन 31 दिसंबर तक मामले की सुनवाई पूरी ना हो तो इस पर रोक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा सकती है.

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मोबाइल और बैंक से आधार लिंक करने के sms में डेडलाइन बताई जाए : सुप्रीम कोर्ट

आधार कार्ड (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बैंक और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से जो लोगों को आधार से लिंक करने के लिए SMS भेजे जाते हैं उसमें डेडलाइन भी बताई जाए. कोर्ट ने मोबाइल फोन और बैंक खातों से आधार को लिंक करने के खिलाफ कल्याणी मेनन और मैथ्यू की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. मामले को मुख्य मामले के साथ जोड़ा. कोर्ट ने कहा कि चूंकि मामले की अंतिम सुनवाई नवंबर में तय है और बैंकों के लिए डेडलाइन 31 दिसंबर है इसलिए अभी कोई अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा है कि अगर डेडलाइन 31 दिसंबर तक मामले की सुनवाई पूरी ना हो तो इस पर रोक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा सकती है. 

केंद्र की ओर से AG ने कहा कि मोबाइल नंबर के लिए 6 फ़रवरी और पुराने बैंक एकाउंट को लिंक करने के लिए आखरी तारीख 31 दिसम्बर है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो पुराने बैंक एकाउंट को आधार से अनिवार्य रूप से लिंक करने की तारिख 31 दिसंबर से 31 मार्च कर सकती है.

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वहीं याचिकाकर्ता की ओर से श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि बैंकों से मैसेज भेजे जा रहे हैं कि आधार से लिंक कराया जाए. जिनके 30-40 साल पुराने अकाउंट हैं, उनके खिलाफ  PMLA एक्ट में कैसे कार्रवाई जा सकती है. वहीं अन्य याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मोबाइल कंपनियां भी ऐसे ही मैसेज भेज रही हैं. कॉल के वक्त ये कहा भी जाता है. 

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इस पर जस्टिस एके सिकरी ने हंसी के अंदाज में कहा कि यहां प्रेस रिपोर्टर हैं और मैं बोलना नहीं चाहता लेकिन ऐसे मैसेज मुझे भी आते हैं. बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इंकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी 31 दिसंबर तक का समय है और आधार के मुख्य मामले की सुनवाई नवंबर के अंत में शुरू होनी है.

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका कल्याणी मेनन सेन ने दायर की है. कल्याणी ने 23 मार्च को टेलिकॉम डिपार्टमेंट द्वारा जारी उस सर्कुलर को भी चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि सभी नागरिकों को अपने मोबाइल नंबरों को भी आधार से लिंक करवाना होगा. उनका कहना है कि दोनों ही फैसलों से लोगों की निजता का हनन होता है इसलिए ये असंवैधानिक हैं. सेन ने अपनी याचिका कहा है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत नियमों में संशोधन करके बैंक खातों के साथ आधार को जोड़ने का फैसला उस वादे का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि बायॉमीट्रिक्स का हिस्सा बनना स्वैच्छिक होगा.


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