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आधार कार्ड के बिना राशन न देने पर Supreme Court सख्त, राज्यों से मांगी रिपोर्ट 

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यों से इसे लेकर जवाब मांगा है.

आधार कार्ड के बिना राशन न देने पर Supreme Court सख्त, राज्यों से मांगी रिपोर्ट 

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड न होने पर लोगों को राशन दिए जाने से मना करने को लेकर राज्यों से रिपोर्ट मांगी है. दरअसल, कुछ दिन सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दावा किया गया था कि भूख की वजह से कुछ लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उनके आधार कार्ड नहीं थी और इसी वजह से उन्हें राशन नहीं मिल पाया था. चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यों से इसे लेकर जवाब मांगा है.कोर्ट ने राज्यों से पूछा है कि क्या बीते कुछ दिनों में ऐसे किसी शख्स से भूखमरी से मौत हुई है जिसे आधार कार्ड न होने की वजह से राशन देने से मना कर दिया गया था.

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मामले की सुनवाई के दौरान CJI बोबडे ने कहा कि वो उस बेंच का हिस्सा थे (जिसने आधार मामले का फैसला किया) जिसने कहा था कि लोगों को आधार ना होने पर सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति नियुक्त करना चाहते हैं. केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदलात को बताया कि रिपोर्ट से यह पता चलता है कि ये सभी मौते भूखमरी से होने वाली मौतें नहीं थीं.

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उन्होंने बताया कि आधार कार्ड की कमी की वजह से किसी को भी भोजन से इनकार नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता कोइली देवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि कई राज्यों में अधिसूचना जारी है लेकिन जब आदिवासी केंद्रों में जाते हैं तो वहां राशन नहीं मिलता है. यह याचिका झारखंड के सिमडेगा, करीमाती की 11 वर्षीय लड़की संतोषी की मां कोइली देवी और बहन गुड़िया देवी की ओर से दायर की गई है जिसकी  28 सितंबर, 2017 को भुखमरी से मृत्यु हो गई थी. याचिका में कहा गया है कि संतोषी की मौत उनके गरीब दलित परिवार के राशन कार्ड को रद्द करने के कारण हुई क्योंकि वह उनके आधार कार्ड से जुड़ा नहीं था.