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जज बीएच लोया की मौत के मामले की जांच के लिए दी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि दो जज लोया के साथ नागपुर के रवि भवन में ठहरे थे वो ही कार में लोया को अस्पताल लेकर गए थे. वहां हाइकोर्ट के रजिस्टार और बाद में हाइकोर्ट चीफ जस्टिस  भी पहुंचे थे. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति के बाद ही डीजी ने इन जजों के बयान लिए थे. ये बयान कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट का हिस्सा हैं.

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जज बीएच लोया की मौत के मामले की जांच के लिए दी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

जज बीएच लोया ( फाइल फोटो )

नई दिल्ली:

सोहराबुद्दीन एन्काउंटर  मामले की सुनवाई कर रहे जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच को लेकर दी गई याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई होगी. पिछली सुनवाई में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से पेश दुष्यंत दवे ने कहा था कि जजों और अन्य के बयानों में विरोधाभास है. इसी कारण लोया की मौत के मामले में संदेह उत्पन्न होता है. लोया के साथ जो जज थे वो उन्हें नागपुर के अस्पताल में नहीं ले गए. वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि दो जज लोया के साथ नागपुर के रवि भवन में ठहरे थे वो ही कार में लोया को अस्पताल लेकर गए थे. वहां हाइकोर्ट के रजिस्टार और बाद में हाइकोर्ट चीफ जस्टिस  भी पहुंचे थे. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति के बाद ही डीजी ने इन जजों के बयान लिए थे. ये बयान कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट का हिस्सा हैं.

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साल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने एन्काउंटर किया था. आरोप है दोनों को फर्जी मुठभेड में मार डाला गया. शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया. उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था. उस समय गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह थे और इस मामले में उन पर भी आरोप लगे.

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साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया. शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश ना होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया. फिर केस की सुनवाई जज बी एच लोया ने की और दिसंबर 2014 में नागपुर  में उनकी मौत हो गई. 


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