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अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की पीठ आज करेगी सुनवाई

अब यह तय हो सकता है कि अयोध्या मामले की सुनवाई किस तारीख से होगी. यह भी तय होगा कि क्या इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी?

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नई दिल्ली:

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी. सुनवाई करने वाली संविधान पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोष भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर हैं. अब यह तय हो सकता है कि अयोध्या मामले की सुनवाई किस तारीख से होगी. यह भी तय होगा कि क्या इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी ?

खास बात यह है कि 27 सितंबर 2018 को तीन जजों की पीठ ने इस मांग को ठुकरा दिया था कि इस्माइल फारूखी के 1994 के उस जजमेंट पर फिर से विचार करने के लिए संविधान पीठ के पास भेजा जाए जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. इसके बाद तीन जजों की पीठ को मामले की सुनवाई करनी थी. इसके बाद अब ये पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया गया. 

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 16 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था.

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इसके साथ ही अयोध्या में 67 एकड जमीन के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने लैंड एक्वीजिशन एक्ट की वैधता पर दखिल याचिका को मुख्य मामले के साथ टैग किया था. हिंदू महासभा के शिशिर चतुर्वेदी और वकील कमलेश कुमार तिवारी के साथ-साथ राम भक्तों ने लैंड एक्वीजिशन एक्ट की वैधता पर सवाल उठाया है. 

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याचिका में कहा है कि राज्य सूची के विषयों की आड़ में केंद्र राज्य की भूमि अधिग्रहीत नहीं कर सकता. जिस एक्ट के तहत 1993 में तब केंद्र की नरसिंहराव सरकार ने 67.7 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने के लिए कानून बनाया वो एक्ट बनाना संसद के अधिकार क्षेत्र में नहीं था. भूमि और कानून व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं. केंद्र को कानून बनाकर राज्य की भूमि अधिग्रहीत करने का अधिकार नहीं है. जब अधिग्रहण ही अवैध तो जमीन वापस देने में क्या परेशानी है.

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