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अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, गोविंदाचार्य ने की थी मांग

याचिका में गोविंदाचार्य ने मांग की थी कि अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए. गोविंदाचार्य की ओर से कहा गया कि कम से कम सुनवाई को लिखा जाए और रिकार्ड किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया.

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अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, गोविंदाचार्य ने की थी मांग

सुप्रीम कोर्ट - (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

बीजेपी के पूर्व नेता और आरएसएस विचारक केएन गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिका में उन्होंने मांग की थी कि अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए. गोविंदाचार्य की ओर से कहा गया कि कम से कम सुनवाई को लिखा जाए और रिकार्ड किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई ने मांग को ठुकरा दी. निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने बहस किया. CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठी में जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने बहस शुरू करते हुए आंतरिक कोर्टयार्ड यानी अहाते के मालिकाना हक पर दावा किया. जैन रामजन्मभूमि परिसर का नक्शा पेश कर कोर्ट को बारीकियां बताया कि आंतरिक अहाते में जहां तीन गुम्बद वाला ढांचा था और राम चबूतरा, सीता रसोई और भंडारा है वहां तो निर्मोही अखाड़े का अधिकार है. हनुमंत द्वार सबसे बाहरी क्षेत्र में है. वहां से लेकर गर्भगृह तक अखाड़े के अधिकार है. यानी अयोध्या मामले की सुनवाई की कोई रिकॉर्डिंग नहीं होगी. जैन ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से इस जमीन और मन्दिर में अखाड़े का ही अधिकार और कब्ज़ा रहा है. इस अखाड़े का रजिस्ट्रेशन भी पहले से है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पहले स्टेटस और लोकस पर दलीलें रखें. इसपर निर्मोही अखाड़ा ने कहा, सदियों पुराने रामलला की सेवा पूजा और मन्दिर प्रबंधन के अधिकार को छीन लिया गया है. ये सिविल सूट आंतरिक कोर्टयार्ड के लिए है जो कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर के पास है. निर्मोही अखाड़ा ने कहा, पहला मुकदमा 1959 में निर्मोही अखाड़े ने दायर किया जब जमीन छीन ली गई थी. अन्य पक्षकारों ने 1980 के दशक में अर्जी दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया था कि निर्मोही अखाड़ा एक प्राचीन धार्मिक प्रतिष्ठान है. सदियों से राम मंदिर के प्रबंधन के प्रभारी रहे हैं.

सीजेआई ने कहा कि हमें संरचनाओं पर स्पष्टता दें. उन्होंने पूछा, ''कहां से प्रवेश होता है? सीता रसोई या हनुमान द्वार?'' CJI ने यह भी पूछा कि निर्मोही अखाड़ा कैसे रजिस्टर्ड हुआ? जस्टिस नजीर ने कहा, आप पहली अपील पर बहस कर रहे हैं. आपको हमें सभी विवरण देने होंगे.

निर्मोही अखाड़ा ने कहा, हमारी मांग है कि इस मसले में नियुक्त कोर्ट रिसीवर को हटा दिया जाए और विवादित जमीन की देखभाल और इसकी कस्टडी का जिम्मा अखाड़े को दे दें.

मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन और CJI के बीच नोकझोंक हुई. निर्मोही अखाडा ने आगे कहा, ''जन्मभूमि पर बनाई गई उस मस्जिद में 16 दिसंबर 1949  में आखिरी बार नमाज़ पढ़ी गई थी. अदालत में दावा 1961 में वक्फ बोर्ड ने दाखिल किया. मुस्लिम पक्षकार की ओर से राजीव धवन के बीच मे टोकने पर कोर्ट ने धवन को फटकारा. जिसमें CJI ने कहा कि गरिमा बनाए रखें. हम किसी की दलीलों को छोटा नहीं करना चाहते. जिसपर धवन ने कहा, कोर्ट ने मुझसे सवाल पूछा मैंने उसका जवाब दिया.

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मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मंगलवार से रोजाना सुनवाई करेगा. मध्यस्थता के माध्यम से कोई आसान हल निकलने का प्रयास विफल होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है.

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पीठ ने दो अगस्त को तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट का संज्ञान लिया था. मध्यस्थता समिति के प्रमुख उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला थेय पीठ ने कहा था कि करीब चार महीने चली मध्यस्थता प्रक्रिया का अंतत: कोई परिणाम नहीं निकला.  

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