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सूरत अग्निकांड: सामने आईं नगर निगम और बिल्डर की खामियां, तीन मंजिला कॉम्पलेक्स में अवैध रूप से बनी थी चौथी मंजिल

चौथी मंजिल की छत काफी नीचे थी और कुर्सियों की जगह बैठने के लिए टायर का इस्तेमाल किया जा रहा था.

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सूरत अग्निकांड: सामने आईं नगर निगम और बिल्डर की खामियां, तीन मंजिला कॉम्पलेक्स में अवैध रूप से बनी थी चौथी मंजिल

इस हादसे में 22 बच्चों की मौत हो गई.

अहमदाबाद:

सूरत अग्निकांड की घटना की प्रारंभिक जांच में स्थानीय नगर परिषद के अधिकारियों और बिल्डरों की ओर से कई खामियों की बात सामने आ रही है. जांच में पाया गया है कि कोचिंग क्लास की संरचना भी आग जैसी घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील थी. इसमें छत काफी नीचे थी और कुर्सियों की जगह बैठने के लिए टायर का इस्तेमाल किया जा रहा था. प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई है कि बिल्डर ने 'प्रभाव शुल्क' के भुगतान के साथ संरचना को मान्यता देने के लिए अर्जी दी तो यह बात छिपा ली कि उन्होंने तीन मंजिला कॉम्पलेक्स में चौथी मंजिल का निर्माण भी किया है. एक शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक संबंधित अधिकारी ने बिल्डर के प्रस्ताव को मंजूरी देते वक्त खुद बिल्डिंग का दौरा नहीं किया था. 

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इन कमियों के अलावा ज्वलनशील पदार्थ, फ्लेक्स एवं टायरों की मौजूदगी, ऐसी कुछ वजहें थीं जिन्होंने सूरत के वाणिज्यिक परिसर में लगी आग को भड़काने का काम किया. साथ ही दमकल की गाड़ियों के घटनास्थल से काफी दूर होने के कारण आग बुझाने के अभियान में रुकावट आयी. शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ कि उच्च ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल और कोचिंग की कक्षाओं में कुर्सी के रूप में टायरों के इस्तेमाल की वजह से आग तेजी से फैली. 

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बता दें सूरत के सरथना इलाके में चार मंजिला कला एवं शिल्प कोचिंग संस्थान तक्षशिला आर्केड कॉम्पलेक्स में शुक्रवार को लगी भीषण आग में 18 छात्राओं समेत 22 छात्रों की मौत हो गयी थी.  इस मामले में संस्थान के मालिक भार्गव भूटानी को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि  इमारत के मालिक हर्षुल वेकारिया और जिग्नेश पघदल फरार हैं. साथ ही सूरत अग्निशमन विभाग के दो अधिकारियों एस. के. आचार्य और कीर्ति मोद को काम में लापरवाही बरतने के लिये निलंबित कर दिया गया है. (इनपुट-भाषा)

वीडियो: स्मार्ट सिटी सूरत में आग बुझाने की व्यवस्था क्यों नहीं?



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