सुशांत के परिवार ने AIIMS की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, CBI से दोबारा फोरेंसिक टीम गठित करने की मांग

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने एम्स (AIIMS) की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट को गलत ठहराते हुए परिवार के वकील विकास सिंह ने जांच एजेंसी के निदेशक को पत्र लिखकर नई फोरेंसिंक टीम गठित करने की मांग की है.

सुशांत के परिवार ने AIIMS की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, CBI से दोबारा फोरेंसिक टीम गठित करने की मांग

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी एम्स की फोरेंसिक रिपोर्ट पर विवाद थम नहीं रहा

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के परिवार ने एम्स (AIIMS) की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट को गलत ठहराते हुए परिवार के वकील विकास सिंह ने जांच एजेंसी के निदेशक को पत्र लिखकर नई फोरेंसिंक टीम गठित करने की मांग की है. उन्होंने सवाल उठाया कि एम्स की रिपोर्ट यह तो कह सकती है कि फांसी के फंदे पर लटकने से मौत हुई, लेकिन टीम यह कैसे कह सकती है कि यह आत्महत्या का मामला है, यह तो सीबीआई को अपनी जांच और सबूतों के आधार पर तय करना है.

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विकास सिंह ने  सीबीआई निदेशक को लिखे तीन पन्नों का पत्र बुधवार को ट्विवटर पर साझा किया. इसमें कहा गया है कि उन्हें मीडिया से एम्स की टीम द्वारा सीबीआई को रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी मिली है. एम्स की टीम के कुछ डॉक्टर टीवी पर भी फोरेंसिक जांच को लेकर सार्वजनिक बयान दे रहे हैं. हमारे लगातार प्रयास के बावजूद फोरेंसिक टीम के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने उन्हें रिपोर्ट की कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई है. अगर लीक रिपोर्ट सही है तो यह गलत, भेदभावपूर्ण और अधूरे साक्ष्यों पर आधारित है. विकास सिंह ने कहा कि सीबीआई को सुशांत की मौत की जांच के लिए नए सिरे से फोरेंसिक टीम का गठन करना चाहिए. इसमें विभिन्न अस्पतालों के फोरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाए. ताकि कूपर हॉस्पिटल के पोस्टमार्टम के तरीके और मृत्यु से जुड़े अन्य तथ्यों पर प्रकाश डाला जा सके.

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एम्स की फोरेंसिक रिपोर्ट पर उठाए ये सवाल---
1.    एम्स पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं तैयार कर रहा था, बल्कि कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम पर उसे अपनी राय देनी थी, उसके द्वारा मृत्यु के कारणों पर कोई राय कायम करने का औचित्य नहीं बनता.
2.    डॉ. सुधीर गुप्ता केस इस संवेदनशील मामले में पहले दिन से ही मीडिया में इंटरव्यू दे रहे हैं. वे कूपर हॉस्पिटल के चिकित्सकों के संदिग्ध पोस्टमार्टम और पोस्टमार्टम को लेकर महाराष्ट्र सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठा चुके हैं. घटना स्थल से छेड़छाड़ और बेरोकटोक आवाजाही को लेकर भी वह अपनी राय देते रहे हैं.
3.    बिना किसी आपात जरूरत के रात में पोस्टमार्टम क्यों किया गया, मजिस्ट्रेट ने भी ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था, इसमें प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया. 
4.    पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं की गई. रिपोर्ट में मौत के समय का भी उल्लेख नहीं है, शरीर पर चोट के निशानों को भी चिन्हित नहीं किया गया है. इस पर फोरेंसिक रिपोर्ट में कोई राय कायम नहीं की गई.
5.    पैर में फ्रैक्चर का भी रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया. ऐसी ही कई अन्य विसंगतियां हैं.
6.    डॉ. सुधीर गुप्ता ने चुनिंदा तरीके से रिपोर्ट के कुछ अंश मीडिया में साझा किए हैं. उन्होंने गैरजिम्मेदाराना तरीके से बयान दिया है कि सुशांत की मौत आत्महत्या थी और इसमें किसी तरह की साजिश नहीं थी. उन्होंने अनैतिक और गैर पेशेवर तरीके से काम किया.