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जब लालू मिट्टी घोटाले की जांच के लिए तैयार हैं, फिर CM नीतीश देर क्यों कर रहे हैं? : सुशील मोदी

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जब लालू मिट्टी घोटाले की जांच के लिए तैयार हैं, फिर CM नीतीश देर क्यों कर रहे हैं? : सुशील मोदी

सुशील मोदी ने राजद प्रमूुख पर मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया है.(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. सुशील मोदी ने 90 लाख के मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया
  2. लालू ने आरोपों को नकारा और मोदी पर साधा निशाना
  3. मानहानि के मुकदमे की धमकी से डरने वाले नहीं हैं
नई दिल्ली: राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के पुत्र पर मिट्टी घोटाला का आरोप लगाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि वे मानहानि के मुकदमे की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अपने बयान पर कायम हैं. सुशील मोदी ने कहा कि लालूजी ने आपने मॉल की मिट्टी को बिना टेंडर के अपने बेटे के विभाग को 90 लाख रुपये में बेच दिया, जो राज्य सरकार में मंत्री है. यह तो आम के आम, गुठली के दाम को चरितार्थ करती है. उन्होंने कहा कि जब लालूजी मिट्टी घोटाले की जांच के लिए तैयार हैं तब फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देर क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि मानहानि के मुकदमे की धमकी से डरने वाला नहीं हूं. आधा दर्जन मुकदमा लड़ रहा हूं. मैं अपने बयान पर कायम हूं.

भाजपा नेता ने दावा किया कि डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और चंदा यादव को 20 जून 2014 को निदेशक बनाया गया. इस कंपनी को 2 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गई. इसी जमीन पर बिहार में एक बड़ा शापिंग मॉल बन रहा है जिसका निर्माण राजद से सुरसंड के विधायक सैयद अबू दौजान की कंपनी कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्माणधीन शापिंग मॉल का संबंध लालू प्रसाद के परिवार से है और उसके दो अंडरग्राउंड फ्लोर की मिट्टी संजय गांधी जैविक उद्यान को 90 लाख रुपये में बेची गई.

सुशील मोदी ने कहा कि संजय गांधी जैविक उद्यान पर्यावरण एवं वन विभाग के अंतर्गत आता है जिसके मंत्री लालू प्रसाद के पुत्र तेज प्रताप हैं. उन्होंने कहा कि इस मॉल की मिट्टी को बिकवाने के लिए सौंदर्यीकरण के नाम पर अनावश्यक रूप से 90 लाख रुपये का अनुमान पगडंडी बनाने के नाम पर किया गया. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद का परिवार अपने मॉल की मिट्टी को अपने ही विभाग को बेचकर 90 लाख रुपये की कमाई कर चुका है.

खड़े किए सवाल
उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई मंत्री अपनी जमीन की मिट्टी को अपने विभाग के लिए खरीद सकता है? क्या बिना टेंडर के 90 लाख रुपये की वस्तु सरकारी विभाग में खरीदी जा सकती है? क्या मुख्यमंत्री पूरी जांच करके संबंधित मंत्री को बर्खास्‍त करेंगे?

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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