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तालिबान-अमेरिका वार्ता स्थगित : भारत चौकन्ना, कश्मीर में हरकतें बढ़ाने के लिए पाकिस्तान भी कर रहा है इंतजार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान के साथ कैंप डेविड में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह फैसला काबुल में हुए हमले के बाद लिया है जिसमें 1 अमेरिकी सैनिक सहित 12 लोगों की मौत हो गई थी.

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तालिबान-अमेरिका वार्ता स्थगित :  भारत चौकन्ना, कश्मीर में हरकतें बढ़ाने के लिए पाकिस्तान भी कर रहा है इंतजार

अमेरिका ने तालिबान के साथ होने वाली बैठक रोक दी है

नई दिल्ली:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान के साथ कैंप डेविड में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह फैसला काबुल में हुए हमले के बाद लिया है जिसमें 1 अमेरिकी सैनिक सहित 12 लोगों की मौत हो गई थी.  उनके इस फैसले पर तालिबान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है और कहा गया है कि ट्रंप ने इस फैसले से अपनी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है.तालिबान की ओर से कहा  गया है कि अमेरका का यह फैसला अविश्वसनीय है. तालिबान के राजनीतिक मामलों के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ट्वीट कर कहा, 'कुछ दिन पहले ही अमेरिका के साथ समझौते तय हुए थे और इसको दोनों पक्षों के नेताओं के पास भेज दिया गया था. हर कोई इससे सहमत था साथ ही इस पर भी राय बनी थी कि कतर इस डील की घोषणा करेगा. लेकिन ट्रंप की ओर से किए गए निराशाजनक ट्वीट ने उनकी विश्वसनीयता को पहुंचाया है'. हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि इसको लेकर काम जारी है लेकिन यह तब तक आगे बढ़ नहीं सकता है जब तक तालिबान अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखाता है.

आपको बता दें कि कई महीनों से कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. हालांकि तालिबान अफगान सरकार से भी बातचीत करने पर अड़ा था जिसे वह अमेरिका की कठपुतली समझता है. बाद में कैंप डेविड में होनी वाली बातचीत में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के आने भी सहमति बनी थी. इस बीच यह खबर आई कि अमेरिका अफगानिस्तान से 5 हजार सैनिक हटाने को सैद्धांतिक रूप से तैयार है अगर तालिबान कुछ बातों की गारंटी दे.


भारत के लिए क्यों है चिंता की बात
1- तालिबान का झुकाव पाकिस्तान की ओर ज्यादा रहता है और वह उसके इशारे पर तालिबान, भारत-अफगान व्यापार को प्रभावित कर सकता है.
2- अफगानिस्तान में भारत ने कर रखा बड़ा निवेश. अफगानिस्तान की संसद को भी भारत के सहयोग से बनाया गया है जिसमें राजस्थान का पत्थर लगा है. 
3- पाकिस्तान अफगान आतंकियों का इस्तेमाल कश्मीर में कर सकता है.
4- अमेरिका अगर अफगानिस्तान से अपनी सेना हटाता है तो तालिबान मजबूत होगा और ऐसा होने पर पाकिस्तान का दखल बढ़ेगा जो भारत के लिए ठीक नहीं होगा. 

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