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सायरस मिस्त्री की बहाली का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले पर रोक लगा दी है. NCLAT ने सायरस की बहाली के आदेश दिए थे.

सायरस मिस्त्री की बहाली का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर लगाई रोक

NCLAT ने सायरस मिस्त्री की बहाली के आदेश दिए थे. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • टाटा संस को सुप्रीम कोर्ट से राहत
  • सायरस मिस्त्री की बहाली का मामला
  • SC ने NCLAT के आदेश पर लगाई रोक
नई दिल्ली:

टाटा संस (Tata Sons) और सायरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) विवाद में टाटा को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले पर रोक लगा दी है. NCLAT ने सायरस की बहाली के आदेश दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह फैसला त्रुटिपूर्ण लगता है क्योंकि किसी ने भी यह मांग नहीं की थी. 18 दिसंबर, 2018 को NCLAT ने सायरस मिस्त्री को टाटा संस के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन पद पर बहाल करने का आदेश दिया था.

NCLAT ने सायरस मिस्त्री की बहाली का आदेश देते हुए कहा था कि इस पद पर एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति अवैध है. इस फैसले के खिलाफ टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. टाटा संस के अलावा रतन टाटा (Ratan Tata) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर NCLAT के आदेश को रद्द करने की अपील की. रतन टाटा ने NCLAT के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें पक्षपातपूर्ण और दमनकारी कृत्य का दोषी माना था. रतन टाटा ने अपनी याचिका में कहा था कि NCLAT ने उन्हें बिना किसी तथ्यात्मक या कानूनी फाउंडेशन के पूर्वाग्रहपूर्ण और दमनकारी कृत्यों का दोषी ठहराया है.

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रतन टाटा ने अपनी याचिका में कहा कि सायरस मिस्त्री को उनकी प्रोफेशनल क्षमता की वजह से चैयरमैन बनाया गया था न कि शापूरजी के प्रतिनिधि के तौर पर. पल्लोनजी ग्रुप महज एक वित्तिय निवेशक है. वहीं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्री ने रविवार को कहा कि वह किसी भी रूप में दोबारा टाटा ग्रुप को जॉइन करने के इच्छुक नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'मैं NCLAT के फैसले का सम्मान करता हूं, जिसने मामले की व्यापक तौर पर जांच-पड़ताल के बाद कंपनी से मेरी बर्खास्तगी को अवैध और रतन टाटा तथा अन्य ट्रस्टियों को दमनकारी तथा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का दोषी पाया.'

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सायरस मिस्री ने आगे कहा, 'मेरा इरादा ये स्पष्ट करने का है कि अपने पक्ष में NCLAT के आदेश के बावजूद मैं टाटा संस के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन या टीसीएस, टाटा टेलीसर्विसेज या टाटा इंडस्ट्रीज के निदेशक के पद पर दोबारा नहीं बैठूंगा. हालांकि माइनॉरिटी शेयर होल्डर के रूप में अपने अधिकारों की रक्षा तथा टाटा संस के बोर्ड में एक सीट पाने और टाटा संस में गवर्नेंस तथा पारदर्शिता के उच्च मानकों को बहाल करने के लिए मैं हर तरह के विकल्प पर विचार करूंगा.'

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