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छठ पर घर जाने के लिए टिकट का टेंशन, खिड़की खुली और वेटिंग टिकट

छठ के दौरान घर जाने वालों के लिए बुधवार को 120 दिन यानी पूरे चार महीने पहले ट्रेन रिजर्वेशन की खिड़की खुली तो चंद मिनटों में ही सभी ट्रेनों में वेटिंग या वेटिंग की सीमा भी समाप्‍त दिखने लगी है.

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छठ पर घर जाने के लिए टिकट का टेंशन, खिड़की खुली और वेटिंग टिकट

चार महीने पहले ट्रेन रिजर्वेशन की खिड़की खुली तो चंद मिनटों में ही सभी ट्रेनों में वेटिंग टिकट दिखाने लगा

खास बातें

  1. बुधवार को 120 दिन यानी पूरे चार महीने पहले ट्रेन रिजर्वेशन की खिड़की खुली
  2. चंद मिनटों में ही सभी ट्रेनों में वेटिंग दिखने लगी
  3. 7 नवंबर को दिवाली है और इसके 6 दिन बाद छठ है.
नई दिल्ली: आप अगर दिवाली या छठ में बिहार जाना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए जानना बहुत ज़रूरी है. छठ के दौरान घर जाने वालों के लिए बुधवार को 120 दिन यानी पूरे चार महीने पहले ट्रेन रिजर्वेशन की खिड़की खुली तो चंद मिनटों में ही सभी ट्रेनों में वेटिंग या वेटिंग की सीमा भी समाप्‍त दिखने लगी है. 7 नवंबर को दिवाली है और इसके 6 दिन बाद छठ है.

छठ के मौके पर बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन बुधवार को जब 8 नवंबर के टिकट के लिए 120 दिन पहले खिड़की खुली तो काउंटर से कुछ ऐसा जवाब मिला. ब्रीद के टिकट काउंटर कलर्क के बताया कि इस वक्त हर गाड़ी में वेटिंग मिलेगा. आप देखिए वैशाली एक्सप्रेस में 183 वेटिंग है. सप्त क्रांति में 121 वेटिंग हो चुकी है. शहीद एक्सप्रेस में 20 वेटिंग है और बिहार संपर्क में तो 484 वेटिंग है. 

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छठ यात्री देवलाल चौरसिया ने बहुत तेज़ी दिखाई थी, मगर पाया कि उनको भी देर हो चुकी है. बिहार जाने वाली 8 नवंबर की तमाम ट्रेनों की सीटें चंद मिनटों में ही बुक हो गईं. कुछ ट्रेनों में तो वेटिंग ही नहीं रिग्रेट भी है. देवलाल चौरसिया को 8 तारीख की छठ की टिकट लेनी थी. सब में वेटिंग है. मिथिलेश घर से कटिहार का कंफर्म्ड टिकट देखकर निकले, लेकिन काउंटर आते-आते हाथों में वेटिंग ही आई. मिथिलेश घर से करीब 9:30 बजे देखा तो 60 सीटें दिखा रहा था. यहां वेटिंग 1 और 2 मिला है.

हर ट्रेन का यही हाल है. राजधानी, शताब्दी, एक्सप्रेस-मेल दिवाली और छठ के लिए पूरब की तरफ़ जाने वाली सारी ट्रेनें लगभग भर चुकी हैं, जिनको बिहार जाने वाली रेगुलर ट्रेनों में जगह नहीं मिली उनके लिए रेलवे के पास स्पेशल ट्रेनें भी हैं.
 
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दिवाली और छठ के दौरान पिछले साल भारतीय रेलवे ने बिहार के लिए कुल 996 ट्रेनें चलाईं और करीब 40 लाख मुसाफिरों को त्‍यौहारों पर घर पहुंचाया. 563 स्पेशल ट्रेनों के जरिए नॉर्दन रेलवे ने करीब 23 लाख यात्रियों को ढोया. वहीं बाकी जोन्स की स्पेशल 433 ट्रेनों ने करीब 17 लाख लोगों को पूजा के दौरान घर पहुंचाया.  

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नॉर्दन रेलवे सीपीआरओ नितिन चौधरी ने कहा कि छठ के दौरान पिछले साल हमने करीब 550 ट्रेनें चलाईं थी. इस बार भी कोशिश इतनी ही ट्रेन चलाने की है. जरूरत पड़ी तो ज्यादा भी चलाएंगे और जिनको रेगुलर ट्रेनों में जगह नहीं मिली. उनको यहां अकोमोडेट करने की भरसक कोशिश रहेगी ताकि वो परिवार के पास पूजा में पहुंच पाएं, तो घर पहुंच कर त्‍यौहार मनाने से पहले चुनौती घर पहुंचने की है.

VIDEO: छठ के टिकट का टेंशन, 120 दिन पहले भी टिकट की मारामारी

 


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