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खुदकुशी करने वाले किसानों के बच्चों ने जंतर-मंतर पर नाटक के जरिए बयां किया दर्द

महाराष्ट्र के अलग-अलग राज्यों के आत्महत्या किए किसानों के बच्चे भी जंतर-मंतर पर जमा हुए. नाटक के जरिए इन बच्चों ने अपने जिंदगी के संघर्ष को पेश किया.

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खुदकुशी करने वाले किसानों के बच्चों ने जंतर-मंतर पर नाटक के जरिए बयां किया दर्द

किसान मुक्ति यात्रा देश के छह राज्य होते हुए जंतर-मंतर पहुंची है.

खास बातें

  1. जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर जमा हुए हजारों किसान
  2. मंडसौर से चली किसान मुक्ति यात्रा 6 राज्य होते हुए जंतर-मंतर पहुंची
  3. मुक्ति यात्रा को 150 से अधिक किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त है
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार को अलग अलग राज्यों के हजारों किसान अपनी समस्याओं को लेकर जमा हुए. मध्य प्रदेश के मंडसौर से चली किसान मुक्ति यात्रा देश के छह राज्य होते हुए जंतर-मंतर पहुंची. 13 दिन चली इस यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है. इसमें 150 से अधिक किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है. किसान मुक्ति संसद ने सरकार के सामने दो मुख्य मांगे रखी हैं. पहली मांग, फसल का पूरा दाम मिले और किसानों को पूर्ण रूप से कर्ज मुक्त किया जाए. इस बीच तमिलनाडु के किसान एक बार फिर जंतर-मंतर लौट आए हैं. तमिलनाडु के किसान नेता अय्याकन्नू के नेतृत्व में तमिलनाडु के किसानों ने किसान मुक्ति संसद को अपना समर्थन दिया.

महाराष्ट्र के अलग-अलग राज्यों के आत्महत्या किए किसानों के बच्चे भी जंतर-मंतर पर जमा हुए. नाटक के जरिए इन बच्चों ने अपने जिंदगी के संघर्ष को पेश किया. जंतर मंतर पर उपस्थित इन बच्चों में से एक अशोक पाटिदार ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि जब वो 5 साल का था तब उसके पिता ने खुदकुशी कर ती थी. इसके बाद गांव वालों ने उसके परिवार को अलग नज़रिये से देखने लगे. गांव में उन्हें किसी ने मदद नहीं की. फिर अशोक को आश्रम जाना पड़ा. अशोक अभी आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहा है. अशोक का कहना है कि किसानों को आत्महत्या नहीं करना चाहिए, किसान आत्महत्या तो कर लेते हैं, लेकिन उनके बच्चे अनाथ हो जाते हैं. उन्हें कोई नहीं पूछता है. अशोक ने कहा कि 'मुझे दुख है क्योंकि मेरे पिता ने खुदकुशी की है, लेकिन मैं इस देश के सभी किसानों को बताना चाहता हूं कि आत्महत्या के विकल्प को छोड़कर हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना चाहिए'.

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इस तरह महाराष्ट्र से आई पल्लवी ने भाषण देते हुए स्टेज पर रो पड़ी. पल्लवी के पिता भी खुदकुशी कर चुके हैं. पल्लवी ने कहा लोग 2-2 रुपये के लिए किसानों से लड़ जाते हैं जो गलत है. पल्लवी ने कहा जैसे आप के बच्चे हैं ऐसे किसानों के भी बच्चे हैं. बच्चे सोचते हैं कि उनके पापा आएंगे उन्हें पेट भर खाना खिलाएंगे. अच्छे कपड़े देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है. पल्लवी ने सरकार से बिनती करते हुए कहा कि सरकार को किसान पर ध्यान देना चाहिए और जब किसान बचेगा तब ही देश बचेगा. महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से आई आई आरती भी भावुक होते हुए बोली कि उसके पिता ने कुछ साल पहले खुदकुशी कर ली. इसके बाद रिश्तेदारों ने उसे आश्रम में डाल दिया. आरती ने भी कहा कि किसानों को खुदकुशी नहीं करनी चाहिए. किसान के आत्महत्या करने से उनके बच्चे अनाथ हो जाते हैं.

सांसद सीताराम येचुरी ने भी किसान मुक्ति संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज की. जंतर-मंतर पर येचुरी ने कहा, 'आप सभी के साथ मैंने भी किसानों अधिकारों के लिए लड़ने का वादा लिया और आपसे यह भी वादा करता हूं कि मैं इस लड़ाई को संसद में ले जाऊंगा.' किसान मुक्ति संसद में शामिल हुए शरद यादव ने कहा, 'यह सिर्फ किसानों की लड़ाई नहीं है, यह पूरे देश की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि जब आप संसद के बाहर यह लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी समय मैं संसद में किसानों की मांगों को समर्थन दूंगा. वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान का दो तिहाई काम करने वाली महिलाओं ने इस किसान मुक्ति संसद को ऐतिहासिक बना दिया है. वहीं प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों और कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को कुचलने पर उतारू है.

 


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