धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस की समय सीमा तय

धार्मिक प्रथाओं के संवैधानिक पहलू को लेकर दाखिल याचिकाओं के सभी पक्षों के वकीलों की सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेट्री जनरल के साथ मीटिंग हुई

धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस की समय सीमा तय

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

सबरीमला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक और धर्म का अभिन्न हिस्सा बताने वाली धार्मिक प्रथाओं के संवैधानिक पहलू को लेकर दाखिल याचिकाओं के सभी पक्षों के वकीलों की आज सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेट्री जनरल के साथ मीटिंग हुई. मीटिंग में तय हुआ कि 10-10 दिन सभी पक्षों को बहस करने के लिए मिलेंगे. यानी याचिका के समर्थन करने वालों को 10 दिन और विरोध करने वालों को 10 दिनों का वक्त मिलेगा. दो दिन जॉइंडर बहस के लिए तय किए गए हैं.

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बहस करेंगे. उनकी बहस की सीमा हालांकि तय नहीं हुई. बहस की शुरुआत वरिष्ठ वकील के परासरण करेंगे. वहीं पारसी समुदाय के लिए बहस वरिष्ठ वकील फली नरीमन करेंगे. इसके अलावा अभिषेक मनु सिंघवी, सीएस वैद्यनाथन, राजीव धवन, वी गिरी, इंदिरा जयसिंह और अन्य भी बहस करेंगे.

नौ जजों की संविधान पीठ ने सभी पक्षों के वकीलों को सेक्रेट्री जनरल के साथ मिलकर तय करने को कहा था कि कौन वकील बहस की शुरुआत करेगा और बहस के किस पक्ष को कितना समय चाहिए. नौ जजों की संविधान पीठ तीन फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी.

 
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