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Ayodhya Verdict: अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने जा रही है संवैधानिक पीठ में शामिल हैं ये 5 जज

Ayodhya Case: सभी पांच जजों जिनमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi), जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ , जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं, की सुरक्षा भी बढ़ा दी है. सूत्रों के अनुसार CJI रंजन गोगोई की सुरक्षा को Z श्रेणी का कर दिया  गया है.

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Ayodhya Verdict: अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने जा रही है संवैधानिक पीठ में शामिल हैं ये 5 जज

Ayodhya Case: अयोध्या मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की बेंच फैसला सुनाएगी

नई दिल्ली:

अयोध्या विवाद (Ayodhya Verdict) में आज सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फ़ैसला आने वाला है. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच फ़ैसला सुनाएगी. बेंच में चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं. बेंच ने 16 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की थी. 6 अगस्त से 16 अक्टूबर के बीच लगातार 40 दिन तक सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरी सबसे लंबी सुनवाई हुई है. इससे केशवानंद भारती से सबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट में तब 68 दिन सुनवाई हुई थी. अयोध्या (Ayodhya Verdict) को लेकर आने वाले फैसले को लेकर सरकार ने अयोध्या समेत देश के सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा चाकचौबंद कर दी है. साथ ही फैसले के केंद्र सरकार ने उन सभी पांच जजों जिनमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi), जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ , जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं, की सुरक्षा भी बढ़ा दी है. सूत्रों के अनुसार CJI रंजन गोगोई की सुरक्षा को Z श्रेणी का कर दिया  गया है.

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 
18 नवंबर 1954 को जन्मे देश के प्रधान  न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे और गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में में जज बने. साल 2010 में उनको पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया. 12 फरवरी 2011 को उनको पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. साल 2012 में उनको सुप्रीम कोर्ट में जज की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद साल 2018 में वह देश के प्रधान न्यायाधीश बने. 


जस्टिस एसए बोबडे
साल 1956 में जन्मे एसए बोबडे ने बीए एलएबी की डिग्री नागपुर से हासिल की है. 1978 में वह बार काउंसिल के सदस्य बने और बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस करने लगे. साल 2010 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज बनाया गया. साल 2012 मे वह मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. साल 2013 में उनको सुप्रीम कोर्ट में जज बने. वह 23 अप्रैल 2021 को रिटायर हो जाएंगे.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने. उन्होंने एलएलएम की डिग्री हॉवर्ड लॉ स्कूल से ली है. सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश और उससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के रूप में सेवाएं दे चुके हैं.  वह साल 1999 में भारत के एसएजी भी रहे हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ मुंबई विश्वविद्यालय और ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलियन नेशनल युनिवर्सिटी, हावर्ड लॉ स्कूल में लेक्चर दे चुके हैं. वहीं युनाइेट नेशन्स की मानवाधिकार उच्चायोग सहित कई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाषण दे चुके हैं. 

जस्टिस अशोक भूषण
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्म 5 जुलाई 1956 को जन्मे जस्टिस अशोक भूषण ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की डिग्री ली है. 1979 में वह बार काउंसिल के सदस्य बने और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की. साल 2001 में उनको इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया. साल 2014 को उनकी नियुक्ति केरल हाईकोर्ट के जज के रूप में हुई. फिर साल 2015 में उनको केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. साल 13 मई 2016 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

जस्टिस एसए नजीर
साल 1958 में जन्मे एसए नजीर कर्नाटक हाईकोर्ट में 1983 को वकील के रूप में सेवाएं शुरू कीं. साल 2003 में उनको कर्नाटक हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया. साल 2004 में वह परमानेंट जज बने. साल 2017 को सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति जज के रूप में हुई.

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