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यदि खान-पान में लाया जाए ये बदलाव, तो भुखमरी से मिल सकती है निजात : स्‍टडी

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यदि खान-पान में लाया जाए ये बदलाव, तो भुखमरी से मिल सकती है निजात : स्‍टडी

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्ली: आहार में मामूली बदलाव लाकर भारत में भूजल के उपयोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इससे वर्ष 2050 तक 1.64 अरब लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की समस्या का हल निकालने में देश को मदद मिल सकती है. एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है. अध्ययन के अनुसार गेहूं और पोल्ट्री उत्पादों की खपत में कमी लाकर और सब्जियों, फलियों और तरबूज, नारंगी एवं पपीता जैसे फलों का सेवन बढ़ाकर भूजल का उपयोग कम किया जा सकता है क्योंकि इनके उत्पादन में कम जल की आवश्यकता होती है.

'द लैनसेट प्लैनेटरी हेल्थ' के पहले अंक में प्रकाशित इस अध्ययन में यह बताया गया है कि इस तरह आहार में बदलाव करने से ना सिर्फ भूजल का उपयोग कम करने में मदद मिल सकती है बल्कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सकती है और इससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

अध्ययन में कहा गया कि आहार में मामूली बदलाव लाने से भारत में भूजल के उपयोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है और वर्ष 2050 तक 1.64 अरब लोगों का पेट भरने की समस्या से निपटने में देश को मदद मिल सकती है. इस अध्ययन में कहा गया है कि आने वाले दशकों में भारत में कृषि क्षेत्र में फसलों की सिंचाई के लिए ताजा पानी की उपलब्धता में गिरावट आने की संभावना है जिससे खाद्य उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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