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विदेश मंत्रालय ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी विभिन्न देशों को दी

विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आए ऐतिहासिक फैसले से विभिन्न देशों के राजनयिकों को अवगत कराया.

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विदेश मंत्रालय ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी विभिन्न देशों को दी

फैसले के बाद मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न देशों और सहयोगी देशों के राजनयिकों को इससे अवगत कराया

नई दिल्ली:

विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आए ऐतिहासिक फैसले से विभिन्न देशों के राजनयिकों को अवगत कराया. सूत्रों ने यह जानकारी दी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अयोध्या के विवादित स्थान पर न्यास के जरिये राम मंदिर बनाने का समर्थन किया और शहर में ही मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया. सूत्रों ने बताया कि फैसले के बाद मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न देशों और सहयोगी देशों के राजनयिकों को इससे अवगत कराया. हालांकि,अभी स्पष्ट नहीं है कि कितने देशों के राजनयिकों को फैसले से अवगत कराया गया है और उन्हें क्या खास संदेश दिया गया. 

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दशकों पुराने तथा पूरे देश को आंदोलित करते रहे केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित भूमि का कब्ज़ा सरकारी ट्रस्ट को मंदिर बनाने के लिए दे दिया गया है, तथा उत्तर प्रदेश के इसी पवित्र शहर में एक 'प्रमुख' स्थान पर मस्जिद के लिए भी ज़मीन आवंटित की जाएगी. इस केस में वादी भगवान रामचंद्र के बालस्वरूप 'रामलला' को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक दिया गया है.

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सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ ज़मीन का एक 'उपयुक्त' प्लॉट दिया जाएगा. न्यायमूर्तियों ने कहा कि ऐसा किया जाना ज़रूरी था, क्योंकि 'जो गलतियां की गईं, उन्हें सुधारना सुनिश्चित करना भी' कोर्ट का उत्तरदायित्व है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 'सहिष्णुता तथा परस्पर सह-अस्तित्व हमारे देश तथा उसकी जनता की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हैं...' कोर्ट ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट या बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए.



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