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सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, हरियाणा में पंचायत चुनाव टलने के आसार

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सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, हरियाणा में पंचायत चुनाव टलने के आसार
नई दिल्ली:

हरियाणा में पंचायत चुनाव का मामला अब अहम दौर में पहुंच चुका है। पंचायत चुनाव के फिलहाल टलने के आसार बन गए हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बड़े सवाल उठा दिए। कोर्ट ने पूछा कि शैक्षणिक योग्यता पंचायत चुनाव में ही सदस्यों के लिए क्यों हैं। सासंदों और विधायकों के लिए यह नियम क्यों नहीं लागू किया जाता ?  

हालांकि हरियाणा सरकार पंचायत चुनाव के लिए  शैक्षणिक योग्यता संबंधी नियम को हटाने के संकेत दे रही है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि क्या पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता को हटाने को तैयार है? अटार्नी जनरल (एजी) ने हरियाणा सरकार की ओर से कहा कि इस योग्यता की शर्त चुनाव में हटाई जा सकती है। मंगलवार को एजी सरकार से बात कर सुप्रीम कोर्ट को बताएंगे।

चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, रोक हटाएं
हरियाणा सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। अब चुनाव घोषित हो चुके हैं और ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को अपनी रोक हटा लेनी चाहिए क्योंकि इससे कंफ्यूजन हो गया है। किसी ने पुराने नियमों के मुताबिक नामांकन दाखिल किया है तो किसी ने नए के मुताबिक। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर बाद में आदेश जारी कर सकता है।


पचास फीसदी को चुनाव लड़ने से कैसे रोक सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट की एमपी और एमएलए के लिए योग्यता की बात पर रोहतगी ने कहा कि हो सकता है कि आगे संसद ऐसा कोई कानून बना दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार 50 फीसदी लोगों को कैसे चुनाव लड़ने से रोक सकती है। इस पर रोहतगी ने कहा कि सरकार इस शर्त को हटा सकती है और वह मंगलवार को सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को बताएंगे।

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चुनाव लड़ने की योग्यता के लिए कई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। पंचायत चुनाव को लेकर लगाई गई अंतरिम रोक हटाने को लेकर राज्य सरकार ने याचिका दायर की है। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए नियम में किए संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को अंतरिम रोक लगा दी थी। राज्य सरकार के नए नियमों के मुताबिक चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग के लिए दसवीं पास, दलित और महिला के लिए आठवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा बिजली बिल के बकाया न होने और किसी केस में दोषी करार न होने के साथ में घर में टायलेट होने की शर्त भी रखी गई है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि 83 फीसदी दलित और 71 फीसदी सामान्य महिलाओं के अलावा 56 फीसदी पुरुष इस कानून से प्रभावित हुए हैं। यह कानून लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। हरियाणा में तीन चरणों में  4, 8 और 11 अक्तूबर को चुनाव होने हैं।



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