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ये 6 बातें ही तय करेंगी कि क्‍या राहुल गांधी 2019 में बन सकते हैं PM?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यदि उनकी पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ‘सबसे बड़े दल’ के रूप में उभरती है तो वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं.

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ये 6 बातें ही तय करेंगी कि क्‍या राहुल गांधी 2019 में बन सकते हैं PM?

राहुल गांधी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पीएम बनना निर्भर करेगा कांग्रेस का चुनाव में प्रदर्शन कैसा रहता है
  2. पूरा विश्वास है कि नरेन्द्र मोदी अगले प्रधानमंत्री नहीं होंगे: राहुल
  3. पीएम मोदी ने इसे राहुल गांधी का अहंकार बताया था
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यदि उनकी पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ‘सबसे बड़े दल’ के रूप में उभरती है तो वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. चर्चा के दौरान राहुल गांधी से सवाल किया गया कि क्या वह अगले प्रधानमंत्री बनेंगे? इस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘यह निर्भर करेगा कांग्रेस का चुनाव में प्रदर्शन कैसा रहता है, यह उस पर निर्भर करेगा. मेरे कहने का अर्थ है, यदि यह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में ऊभरती है तो, हां.’ राहुल ने कहा था कि उन्हें ‘पूरा विश्वास’ है कि नरेन्द्र मोदी अगले प्रधानमंत्री नहीं होंगे.  हालांकि पीएम मोदी ने इसे राहुल गांधी का अहंकार बताया. राहुल का यह सपना सच करने के लिए कांग्रेस को अकेले 100 से अधिक सीटें जीतनी होंगी. 
 
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1- 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 19 राज्‍यों में विधानसभा के चुनाव हुए हैं. इन 19 राज्यों में लोकसभा की 371 सीटें हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इन 371 सीटों में से 191 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. लेकिन अब इन 19 राज्यों में बीजेपी की सीटें घटकर 148 रह गई हैं, यानि 43 कम. 

 
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2- राजस्थान के उपचुनावों में बीजेपी को झटका लगा है. 2014 में बीजेपी को 58 फीसदी वोट मिले थे और उपचुनाव में यह घटकर 41 फीसदी रह गए. वहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत 37 से बढ़कर 53 फीसदी हो गया है. उपचुनाव के बाद राजस्थान में यदि सीटों का अनुमान देखें तो लोकसभा में बीजेपी की सीट 25 से घटकर 8 रह जाएंगी और कांग्रेस की सीट शून्य से बढ़कर 17 हो जाएगी. 

 
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3- इसी तरह 20 राज्यों की 396 सीटों में जहां 2014 में बीजेपी को 216 सीट मिली थीं वे घटकर 156 रह जाएंगी, यानि बीजेपी को 60 सीटों का नुकसान हो रहा है. 

 
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4-राहुल गांधी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है उत्तर-प्रदेश का चुनाव है क्‍योंकि गोरखपुर और फूलपुर के आकड़ों को आधार बनाया जाए तो यहां सपा-बसपा गठबंधन गुल खिला सकता है. यहां बीजेपी की सीट 71 से घटकर 21 रह जाएगी और इसी को यदि लोकसभा की सभी सीटों पर आधार बनाकर निकाला जाए तो बीजेपी की सीटें 287 से घटकर 177 रह जाएंगी. यानि 110 सीटों का नुकसान हो सकता है. 

 
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5- 11 राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने होती हैं. 2014 के लोकसभा के आंकड़ों को देखें तो इन राज्यों की कुल 214 सीटों में बीजेपी को 163 मिली थीं और कांग्रेस को 18 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. यदि 2017 के गुजरात चुनाव को आधार बनाकर देखें तो इन 214 सीटों में से बीजेपी को 151 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 30 सीटें और यदि राजस्थान चुनाव को आधार बनाते हैं तो कुल 214 सीटों में बीजेपी को 134 और कांग्रेस को 47 सीटें मिलेंगी. बाकी बची 330 सीटों में 2014 में कांग्रेस को 26 सीटें ही मिली थीं. पंजाब में कांग्रेस की 5 सीटें बढ़ने के आसार हैं. 

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6- अब कांग्रेस को 100 सीटों का आंकड़ा छूना है तो तीन राज्य कर्नाटक, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ का चुनाव काफी महत्‍वपूर्ण है. यहां कुल 68 सीटें हैं,  जिसमें 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 12 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि जरूरत है 34 सीटों की. इसलिए कांग्रेस को आने वाले लोकसभा चुनाव में इन राज्यों में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी. यही वजह है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की कमान कमलनाथ को सौंप दी है, जिन्हें कहा गया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी साथ लेकर चलें जिससे कि सिंधिया की नाराजगी पार्टी को न भुगतना पड़े. 

VIDEO: क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 में बन सकते हैं पीएम?
 


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