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सौहार्द की मिसाल: इस शहर में मंदिरों के लिए फूल उगा रहे हैं मुस्लिम परिवार

इस गांव में रहने वाले 40 मुस्लिम परिवार फूलों की खेती करते हैं. खास बात यह है कि इनके द्वारा उगाए जाने वाले ज्यादातर फूल आसपास के मंदिरों में अर्पित किए जाए जाते हैं.

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सौहार्द की मिसाल: इस शहर में मंदिरों के लिए फूल उगा रहे हैं मुस्लिम परिवार

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

देश के कई हिस्सों में इन दिनों सांप्रदायिक संघर्षों के बीच झारखंड के धनबाद जिले के एक छोटे से गांव ने सौहार्द की नई मिसाल पेश की है. दरअसल, इस गांव में रहने वाले 40 मुस्लिम परिवार फूलों की खेती करते हैं. खास बात यह है कि इनके द्वारा उगाए जाने वाले ज्यादातर फूल आसपास के मंदिरों में अर्पित किए जाए जाते हैं. जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर बलियापुर प्रखंड के विखराजपुर गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार बीते चार दशकों से यह काम कर रहे हैं. इसी गांव में रहने वाले एक किसान शेख शमसुद्दीन ने बताया कि अपनी आजीविका के लिए वह और उन जैसे कई परिवार फूलों की खेती पर निर्भर हैं.

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उन्होंने बताया कि हम झरिया शहर में एक व्यापारी को फूल और माला भेजते हैं और फिर वह जरूरत के हिसाब से विभिन्न मंदिरों के एजेंटों को इन्हें बेच देते हैं. इतना ही नहीं यह किसान रामनवमी और दुर्गा पूजा जैसे मौकों पर आसपास के मंदिरों को भी मुफ्त में सजाते हैं. झरिया में एक स्थानीय काली मंदिर के पुजारी दयाशंकर दुबे ने बताया कि विखराजपुर में ये किसान त्यौहारों के दौरान कभी भी फूल भेजने से नहीं चूकते हैं. उन्होंने बताया कि मंदिर समिति उनके योगदान की, अलग- अलग तरीकों से भरपाई करने की कोशिश करती है.


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खास बात यह है कि मंदिरों में फूल भेजने के काम में सांप्रदायिक तनाव कभी भी आड़े नहीं आया.  एक अन्य किसान मोहम्मद सैफी ने बताया कि यह हमारी आजीविका का सवाल है.कोई भी सांप्रदायिक तनाव हमें पिछले 40 सालों से फूल उगाने और बेचने से नहीं रोक पाया है. ऐसे भी मौके आए जब किसानों पर पेशा बदलने के लिए गहरा दबाव था, लेकिन उन्होंने इन सब के बावजूद भी यह काम नहीं छोड़ा.

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VIDEO: दंगों से किसी का भला नहीं.

फूल किसान अनवर अली ने बताया कि दबाव तो कई ओर से रहा कि फूल उगाने के बजाय सब्जियां और नगदी फसलों की ओर ध्यान दें तो आर्थिक लाभ अधिक होगा. लेकिन गांव वाले फूलों के कारोबार से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं. (इनपुट भाषा से)



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