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टीपू सुल्तान जयंती उत्सव : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की 'सराहना' के बाद विवाद और गहराया

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टीपू सुल्तान जयंती उत्सव : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की 'सराहना' के बाद विवाद और गहराया

टीपू सुल्तान जंयती उत्सव : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की 'सराहना' के बाद विवाद और गहराया (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कर्नाटक को योद्धाओं की भूमि बताया
  2. बोले- टीपू सुलतान ने ब्रिटिश राज से लड़ते हुए बहादुरों की मौत पाई
  3. टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर सियासी घमासान चल रहा है
नई दिल्ली:

टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 18वीं सदी के मैसूर के शासक की खुलकर प्रशंसा कर दी जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया है. यह घटनाक्रम 10 नवंबर को टीपू सुलतान की जयंती मनाने के राज्य सरकार के कदम पर मचे विवाद के बीच हुआ. भाजपा इस कदम का पुरजोर विरोध कर रही है. उसका आरोप है कि शेर-ए-मैसूर के नाम से मशहूर 18वीं सदी के मैसूर के शासक ‘धर्मांध’ और ‘जालिम हत्यारा’ थे. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा है कि राज्य विधानमंडल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिया गया भाषण उनका अपना था, जिसमें उन्होंने टीपू सुलतान की सराहना की थी. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है.

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क्या कहा था राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने...
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कर्नाटक को योद्धाओं की भूमि बताते हुए कहा, ‘टीपू सुलतान ने ब्रिटिश राज से लड़ते हुए बहादुरों की मौत पाई. वह विकास के प्रणेता थे और जंग में उन्होंने मैसूर राकेट का इस्तेमाल किया था. यह तकनीक बाद में यूरोपवासियों ने अपनाई.’ इससे पहले कोविंद ने कृष्णदेवराय समेत कर्नाटक की अन्य ऐतिहासिक हस्तियों के योगदान की चर्चा की. कृष्णदेवराय 1509 से 1529 तक विजयनगर साम्राज्य के शासक थे. राज्य विधानसभा के विधान सौध की हीरक जयंती मनाने के लिए आयोजित इस सत्र में राष्ट्रपति ने जैसे ही टीपू सुलतान का जिक्र किया, कांग्रेस विधायकों ने मेजें थपथपा कर अभिवादन किया.

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सवाल किया..
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सवाल किया, ‘राष्ट्रपति राज्य का भाषण कैसे पढ़ सकते हैं? क्या यह संयुक्त सत्र का संबोधन था?’ कनार्टक विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के भाषण में टीपू सुलतान का नाम लिए जाने के बाद सियासी वाकयुद्ध छिड़ गया. राष्ट्रपति के संबोधन के बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने संबोधन में टीपू सुलतान का जिक्र कर राष्ट्रपति के कार्यालय को ‘गुमराह’ किया है. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘कर्नाटक विधानमंडल में सम्मानित राजनेता की तरह संबोधन देने के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद को बधाई.’

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हेगड़े के ट्वीट से शुरू हुआ था विवाद
केंद्रीय मंत्री हेगड़े के ट्वीट के बाद विवाद शुरू हो गया था. टीपू के वंशजों ने केंद्रीय मंत्री से माफी मांगने के लिए कहा था. हेगड़े ने कर्नाटक के अधिकारियों को लिखे पत्र की कॉपी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, मैंने कर्नाटक सरकार को एक ऐसे बर्बर हत्यारे, कट्टरपंथी और मास रेपिस्ट का महिमामंडन के लिए आयोजित होने वाली जयंती कार्यक्रम में मुझे नहीं बुलाने के बारे में बता दिया है.

कर्नाटक सरकार 2015 से मना रही है जयंती
कर्नाटक सरकार 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती का आयोजन किया है. कर्नाटक सरकार साल 2015 से टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है. उस साल भी इसका जमकर विरोध हुआ था. टीपू सुल्तान 18वीं सदी में मैसूर साम्राज्य के शासक थे. उनके शासनकाल पर शिक्षाविदों, इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों के बीच मतभेद रहे हैं.



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