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तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन ने किया फेसबुक लाइव, पीएम नरेंद्र मोदी पर की ये भविष्‍यवाणी

ब्रायन ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए एक साथ आएं. साथ ही भाजपा से सवाल किया कि त्रिपुरा में जीत के बाद इतना खुश क्यों है.

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तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन ने किया फेसबुक लाइव, पीएम नरेंद्र मोदी पर की ये भविष्‍यवाणी

तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन.

खास बातें

  1. बंगाली बहुत त्रिपुरा में बीजेपी की जीत
  2. बंगाल में बीजेपी के मजबूत होने की संभावना
  3. डेरेक ने पीएम को लेकर 2019 की बात कही.
नई दिल्ली: बंगाली बहुल राज्य त्रिपुरा में बीजेपी की अपार सफलता के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने कहना शुरू कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जता रहे हैं. ऐसे में राज्य में लेफ्ट को हराकर सत्ता में आई तृणमूल कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आना तय है.  पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर अपनी राय रखी है. यह राय उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी दी है. उनकी भविष्‍यवाणी है कि पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2018 को लाल किले की प्राचीर से अंतिम बार भाषण देंगे. डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट कर फेसबुक लाइव का लिंक शेयर किया है.

गौरतलब है कि बंगाली बहुल त्रिपुरा में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बीच ब्रायन ने यह भविष्‍यवाणी की है. 

मीडिया से बातचीत में ब्रायन ने कहा, 'पहले 2019 को संभालें, फिर उसके बाद बंगाल के बारे में कल्पना करें. यह भाजपा के लिए हमारा स्पष्ट संदेश है. अगर उनका निशाना बंगाल है तो हमारा टारगेट लाल किला है. मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भाषण नहीं दे पाएंगे.'

वहीं ब्रायन ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए एक साथ आएं. साथ ही भाजपा से सवाल किया कि त्रिपुरा में जीत के बाद इतना खुश क्यों है.

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उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में लोकसभा उपचुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. ब्रायन ने कहा, '15 दिन पहले ही राजस्थान उपचुनाव के नतीजे आए हैं. इसमें अलवर की सीट भी शामिल है जहां वर्ष 2014 में उसने 2.80 लाख वोटों से जीत हासिल की थी, लेकिन उपचुनाव में उसे 1.50 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा.'

बता दें कि शनिवार को आए चुनाव परिणाम में भाजपा ने त्रिपुरा में सीपीएम के 25 साल के शासन को उखाड़ फेंका और राज्य में केसरिया परचम लहराया. त्रिपुरा में 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक आबादी में 30 फीसदी आदिवासी समुदाय के लोग हैं, जबकि 66 फीसदी लोग गैर-आदिवासी बंगाली हिंदू हैं.


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