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तीन तलाक बिल राज्‍यसभा में पेश, विपक्ष के संशोधनों पर जेटली को ऐतराज

महाराष्ट्र में सोमवार को हुई हिंसा को लेकर विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बीच राज्यसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल पेश किया. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक समाज में अभी भी जारी है.

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तीन तलाक बिल राज्‍यसभा में पेश, विपक्ष के संशोधनों पर जेटली को ऐतराज

तीन तलाक बिल राज्‍यसभा में पेश, विपक्ष के संशोधनों पर जेटली को ऐतराज

खास बातें

  1. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक समाज में अभी भी जारी है
  2. तीन तलाक बिल का विरोध नहीं है: गुलाम नबी आजाद
  3. लोकसभा में कांग्रेस साथ थी तो यहां विरोध क्‍यों: अरुण जेटली
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सोमवार को हुई हिंसा को लेकर विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बीच राज्यसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल पेश किया. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक समाज में अभी भी जारी है. वहीं गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलितों का महराष्‍ट्र में जो हाल हुआ है हम उसका विरोध कर रहे हैं. ये तीन तलाक बिल का विरोध नहीं है. वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस साथ थी तो यहां विरोध क्‍यों कर रही है. 

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विपक्ष ने इस बिल में 2 संशोधन का प्रस्‍ताव रखा है. राज्यसभा में बिल पेश किए जाने के बाद विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव पर सदन के नेता अरुण जेटली ने गंभीर आपत्ति जताई और कहा कि वह इस बात से काफी हैरान हैं कि प्रस्ताव अचानक पेश किया गया, नियमानुसार कम से कम एक दिन पहले नहीं. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, "यह विधेयक दो-तीन पहले ही वितरित कर दिया गया था... संशोधन के लिए विचार का नोटिस कम से कम एक दिन पहले दिया जाना चाहिए, लेकिन यह प्रस्ताव एक दिन पहले नहीं दिया गया..."

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जेटली ने कहा, "मैंने कभी इस तरह का कोई संशोधन प्रस्ताव नहीं देखा, जिसे कम से कम 24 घंटे पहले नहीं रखा गया हो, और जिसमें पहले ही कह दिया गया हो कि इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाएगा, और कमेटी सदस्यों के नाम भी ज़ुबानी बता दिए गए हों... ऐसा सदन में कभी भी नहीं हुआ है..." केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि पूरा देश यह देख रहा है कि निचले सदन में इस विधेयक को समर्थन दिया गया था, लेकिन यहां उसका विरोध किया जा रहा है.

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अरुण जेटली ने अपने संबोधन में वे कारण भी गिनाए, जिनके चलते इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास नहीं भेजा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब इस प्रथा को 'असंवैधानिक' घोषित किया गया था, तब दो जजों ने - जो इस प्रथा को 'नाजायज़' मानते थे, 'असंवैधानिक' नहीं - अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर इसे छह माह के लिए निलंबित करवा दिया था. जेटली के मुताबिक, इसी वजह से लोगों की संसद से इस बिल को लेकर उम्मीदें थीं, और इसके चलते यह ज़रूरी है कि हम ज़िम्मेदारी से बर्ताव करें. एक पार्टी, जिसने निचले सदन में बिल का समर्थन किया था, अब उसका विरोध कर रही है.

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