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कमलनाथ का 'शक्ति परीक्षण': BJP की 'धमकी' बेअसर- उसी के दो विधायकों ने इस बिल पर दिया सरकार का साथ

मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने विधानसभा में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बिल पास करवाने के बहाने सरकार का शक्ति परीक्षण कर दिया. इस दौरान सरकार के समर्थन में बहुमत से ज्यादा वोट पड़े.

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खास बातें

  1. कमलनाथ ने जुटाए संख्या से ज़्यादा वोट
  2. ऐडवोकेट प्रोटेक्शन बिल पर 122 MLA साथ
  3. बीजेपी के ही दो विधायकों ने दिया सरकार का साथ
भोपाल:

कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिराने के बाद मध्यप्रदेश की कमलनाथ (Kamal Nath)  सरकार को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा. सदन में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि जिस दिन हमारे नंबर-1 और नंबर-2 कह देंगे यह सरकार एक दिन भी नहीं चल पाएगी. इस पर सीएम कमलनाथ ने चैलेंज देते हुए कहा था कि आपके नंबर-1 और नंबर-2 समझदार हैं, इसलिये आदेश नहीं दे रहें. आप चाहें तो अविश्वास प्रस्ताव ले आएं. बता दें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने चैलेंज को शाम होते-होते पूरा भी कर दिया. उन्होंने विधानसभा में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बिल पास करवाने के बहाने सरकार का शक्ति परीक्षण कर दिया. इस दौरान सरकार के समर्थन में बहुमत से ज्यादा वोट पड़े. खास बात यह रही है बीजेपी के दो विधायकों ने ही कमलनाथ सरकार के इस बिल का समर्थन कर दिया. एमपी की कमलनाथ सरकार को इस दौरान 122 मत मिले.


इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, 'ये बहुमत सिद्ध करने का मतदान है. इसमें बीजेपी के दो सदस्यों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने सरकार का साथ दिया. हमें 122 मत मिले. हमारी सरकार अल्पमत की सरकार नहीं है. उधर, नारायण त्रिपाठी ने कहा कि घर वापसी हुई है.

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इससे पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि रोज-रोज अल्पमत की सरकार की ढोलकी बजाते रहते हैं, आज हो ही जाये आर पार. वहीं हंगामे के बीच बसपा विधायक रामबाई ने कहा कि कमलनाथ सरकार अंगद के पांव की तरह अडिग है. पैसे दोगे तो खा भी लेंगे और साथ भी नहीं देंगे.

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बता दें कि भाजपा नेताओं पर सदन के बाहर बार-बार कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस नीत मध्य प्रदेश सरकार के गिरने का बयान देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने सोमवार को कहा था कि यदि भाजपा में हिम्मत है तो वह विधानसभा के मौजूदा मॉनसून सत्र में साबित करे कि कमलनाथ सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने मीडिया को बताया था, ‘भाजपा नेता सदन के बाहर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरने के बयान देते हैं. बजट के दौरान मौके होते हैं. भाजपा ने सदन में मत-विभाजन क्यों नहीं मांगा?''

बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा में सदस्य संख्या 230 है. कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं. वहीं उसे 4 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा के विधायक का समर्थन मिला हुआ है, जिसके चलते 230 विधायकों वाली विधानसभा में कमलनाथ सरकार के पास कुल 121 विधायक हैं जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 5 विधायक ज्यादा हैं. वहीं बीजेपी के विधायकों की संख्या 108 है.

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VIDEO: मध्य प्रदेश में एक बिल पर कमलनाथ के साथ आए 122 विधायक



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