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पीएम मोदी के उद्धाटन के दो महीने बाद दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के साइकिल ट्रैक पर आई दरार

हाल ही में बने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे जिसको NH-24 के नाम से भी जाना जाता है. उस पर बने साइकिल ट्रैक पर करीब 100 मीटर लंबी दरार आ गयी है.

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पीएम मोदी के उद्धाटन के दो महीने बाद दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के साइकिल ट्रैक पर आई दरार

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर बने साइकिल ट्रैक पर करीब 100 मीटर लंबी दरार आ गयी है

नई दिल्ली:

हाल ही में बने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे जिसको NH-24 के नाम से भी जाना जाता है. उस पर बने साइकिल ट्रैक पर करीब 100 मीटर लंबी दरार आ गयी है. ये दरार ट्रैक के बीचों बीच आई है और माना जा रहा है कि ये दरार सोमवार को आई है, जिसके बाद जेसीबी मशीन बुलाकर ट्रैक को तोड़कर दोबारा बनाने का काम शुरू किया गया है. 

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आपको बता दें कि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे के पहले हिस्से का उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो महीने पहले 27 मई को किया था. यूपी गेट से लेकर निज़ामुद्दीन तक बने करीब 8.5 किमी के पहले हिस्से को बनाने में करीब 841 करोड़ रुपये की लागत आई. ये दरार यूपी गेट के पास उसी साइकिल ट्रैक पर आई है जहां से ये शुरू होता है. अब सवाल ये उठ रहा है कि बनने के 2 महीने में ऐसा क्या हुआ जो साइकिल ट्रैक में दरार आ गई? जबकि इस पर ना भारी वाहन गुजरते हैं, ना ही कार, ना दोपहिया तो फिर इस सीमेंट कंक्रीट के बने हिस्से में बीचों बीच दरार आने का कारण क्या है? हाल ही में हुई बारिश में इस एक्सप्रेस वे पर बहुत जल भराव की खबर आई लेकिन जल भराव से साइकिल ट्रैक में दरार आ जाना फिर भी समझ से बाहर है. 


वहीं, NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर पी सिंह ने कहा कि साइकल ट्रैक को अगले फेज में जोड़ने के लिए यूपी गेट के पास जहां इसका अंत होता है वहां ट्रैक के नीचे एक अस्थायी दीवार बनाई गई थी. बारिश में वो दीवार गिर गई जिससे पानी अंदर आ गया और मिट्टी ढह गई और फिर क्रैक आ गया. हम आज या कल में इसको फिर बना देंगे.
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के उद्घाटन के 20 दिन के अंदर ही चोर करीब ढाई करोड़ के माल पर हाथ साफ कर दिया था. सोलर पैनल हो या फ़व्वारा, एक्सप्रेसवे की बाड़ हो या साज-सज्जा का सामान चोरी करके ले गए थे. चोर बागपत से डासना के बीच करीब 50 किमी में इस तरह  250 सोलर पैनल लगाए गए थे, जिनमें आधे से ज्यादा सोलर पैनल या बैटरी चोरी हो चुके थे. एक सोलर पैनल की कीमत डेढ़ लाख के करीब है. इस सोलर पैनल का काम ऊर्जा को इस बैटरी में संचित करती थी, जिससे इस तरह के अंडर पास में रोशनी करना था, ताकि अंडरपास से गुजरने वाले राहगीरों को अंधेरे का सामना न करना पड़े.
 



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