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कश्मीर में मां की पुकार सुन दो युवा आतंक का दामन छोड़ घर वापस लौटे

कश्मीर में एक बार फिर से मां की पुकार रंग लाई है. मां की पुकार सुन आतंक के रास्ते पर आगे बढ़ चुके दो युवा वापस अपने घर लौट आये हैं.

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कश्मीर में मां की पुकार सुन दो युवा आतंक का दामन छोड़ घर वापस लौटे

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  1. मां की फरियाद सुन आतंक का रास्ता छोड़ दो युवकों की घर वापसी.
  2. इस साल अब तक करीब 10 युवा हथियार छोड़ कर सरेंडर कर चुके हैं.
  3. आतंक का रास्ता छोड़ने वाले युवकों से पुलिस अच्छे से पेश आ रही है.
नई दिल्ली: कश्मीर में एक बार फिर से मां की पुकार रंग लाई है. मां की पुकार सुन आतंक के रास्ते पर आगे बढ़ चुके दो युवा वापस अपने घर लौट आये हैं. अनगिनत मां की तरह इनकी मां ने भी सोशल मीडिया में अपने बेटे को आतंक का दामन छोड़ने की अपील की थी और अपनी मां की फरियाद सुन दोनों युवक घर लौट आए. हालांकि, अभी भी कई मांए अपने बेटों के वापसी के इंतज़ार में आज भी दरवाजे की तरफ टकटकी लगाये खड़ी हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, जिस समय सोमवार को काजीकुंड में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी, तब उसी समय दो स्थानीय युवक जो भटक कर आतंकवाद की राह पर चल निकले थे. वो अपनी मां की पुकार सुन चुपचाप अपने घर लौट आए. दो युवकों के सरेंडर की पुष्टि पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने की है. 

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पुलिस महानिदेशक ने कहा कि दोनों युवक हिंसा का रास्ता छोड़ अपने घर लौट आए हैं. घर वापसी पर इनका स्वागत है. सुरक्षा वजहों से इनका नाम का खुलासा नहीं किया गया है. आपको ये बता दें कि दोनों के परिजन लगातार सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में थे ताकि वह आतंकी बने अपने बच्चों को सकुशल घर ला सकें. इसके साथ ही इन्होंने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया और बात बन गई.

फिलहाल दोनों युवकों को पुलिस के पास रखा गया है. उनके परिजन भी उनसे मिल चुके हैं. उनकी काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी है. अगले एक दो दिन में युवकों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा. गौरतलब है कि पिछले महीने अनंतनाग में आतंकी माजिद इरशाद परिवार के पुकार पर हथियार का दामन छोड़ घर वापस आने से कई युवा अपने घर लौट आए हैं. 

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इस साल अब तक करीब 10 युवा हथियार छोड़ कर सरेंडर कर चुके हैं जबकि पिछले साल ये संख्या ना के बराबर थी. इस साल ज्यादातर युवा अपनी मां या फिर अपने परिवार की पुकार सुनकर ही घर लौटे हैं. बड़ी बात ये भी कि युवा आतंक की राह छोड़कर वापस घर लौटे हैं तो उन्हें सुरक्षाबल परेशान नहीं कर रहे हैं बल्कि आगे बढ़कर मुख्यधारा में शामिल करवाने हेतु हर संभव मदद कर रहे हैं.

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