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मंत्रालय बदले जाने के बाद बोलीं उमा भारती, हां मुझे पीएम मोदी से डांट पड़ी है, लेकिन...

उमा भारती ने कहा है कि कोई मुझे गंगा से कोई दूर नहीं कर सकता. गंगा की स्वच्छता को लेकर मेरा प्रदर्शन खराब नहीं रहा.

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मंत्रालय बदले जाने के बाद बोलीं उमा भारती, हां मुझे पीएम मोदी से डांट पड़ी है, लेकिन...

केंद्रीय मंत्री उमा भारती (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. उमा भारती ने की गंगा पदयात्रा शुरू करने की घोषणा
  2. 'गंगा स्वच्छता को लेकर मेरा प्रदर्शन खराब नहीं रहा'
  3. 'पोर्टफोलियो बदले जाने के पीछे मेरी इच्छा थी'
नई दिल्ली: कैबिनेट फेरबदल के बाद जल संसाधन और गंगा स्वच्छता की जगह पेयजल और स्वच्छता मंत्री के तौर पर पदभार संभालने वाली उमा भारती ने कहा है कि कोई मुझे गंगा से कोई दूर नहीं कर सकता. गंगा की स्वच्छता को लेकर मेरा प्रदर्शन खराब नहीं रहा. उन्होंने अक्टूबर के पहले सप्ताह से गंगा पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है. यह पदयात्रा गंगा सागर से शुरू होगी और एक साल तक चलेगी. उमा भारती ने कहा, कोई क्या सोचता है उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन मैं गंगा के कामकाज में फेल नहीं हुई हूं. उमा भारती ने कहा, पोर्टफोलियो बदलने के पीछे मेरी इच्छा थी. मैंने प्रधानमंत्री से गंगा के किनारे पदयात्रा करने की अनुमति मांगी थी. अब वो इच्छा पूरा करने जा रही हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करती हूं. इसके साथ ही उमा भारती ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री से मुझे डांट पड़ी है, लेकिन कामकाज के लिए नहीं, बल्कि मेरा वजन बढ़ने के लिए. पीएम ने मुझे डांटा और कहा कि तुम्हारा वजन बढ़ रहा है.

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सोमवार को जब गडकरी ने जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद पिछले तीन सालों में नदी की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिए उमा भारती के कठिन प्रयासों की सराहना की थी. गडकरी ने कहा कि वे इस बात का प्रयास करेंगे कि मंत्रालय उन सभी लक्ष्यों को हासिल करे, जो उमा भारती ने निर्धारित किए हैं.

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गौरतलब है कि केंद्र ने गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए 2018 का लक्ष्य निर्धारित किया है. यह नदी लाखों भारतीयों के जीवन को किसी न किसी तरह प्रभावित करती है. जल संसाधन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार नमामि गंगे मिशन के तहत 12,500 करोड़ रुपये की कुल 160 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. वैसे गंगा को स्वच्छ बनाने का यह मिशन 20000 करोड़ रुपये का है.


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