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उन्नाव रेप पीड़िता की मौत पर कुछ यूं छलका कुमार विश्वास का दर्द...

सफ़दरजंग अस्पताल में पीड़िता के लिए अलग आईसीयू बनाया गया था. जहां डॉक्टरों की एक टीम लगातार निगरानी कर रही थी. लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.

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उन्नाव रेप पीड़िता की मौत पर कुछ यूं छलका कुमार विश्वास का दर्द...

उन्नाव मामले पर कुमार विश्वास ने ट्वीट किया है

खास बातें

  1. कवि विश्वास ने रेप पीड़िता की मौत पर जताया दुख
  2. सत्ता-व्यवस्था के प्रति अविश्वास को बताया लोकतंत्र में भीषण अमंगलकारी
  3. पीड़िता को दिल्ली लाया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सका
नई दिल्ली:

उन्नाव रेप (Unnao Rape) पीड़िता की मौत पर कवि कुमार विश्वास (Kumar Vishvas) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. इस मामले पर कवि विश्वास ने लगातार ट्वीट किए हैं. कुमार विश्वास ने एक ट्वीट में लिखा, "क्यूं नहीं मिलता उन्नाव की बेटी को न्याय? 90 बलात्कार केस, निराला-चंद्रशेखर आज़ाद के उन्नाव में? आप सबकी उबल रही जिज्ञासा का शमन शायद वहां के सांसद जी के इस बधाई संदेश से हो जाए! पढ़िए और नेताओं-पार्टियों-जातियों के बंधक बनकर कुतर्क करिए! कुछ नहीं हो सकता हम सब का." एक दूसरे ट्वीट में विश्वास ने लिखा, "ज़िंदा जली उन्नाव की बेटी ने अकेले दम नहीं तोड़ा है, उसके साथ-साथ हमारी तथाकथित संवेदनशीलता, हमारी संस्कारशीलता, हमारी न्यायपालिका, हमारी व्यवस्था और हमारी राजनैतिक इच्छाशक्ति ने भी दम तोड़ा है. ज़मीन के नीचे धधक रही असंतोष व बेचैनी की आग को पहचानो हुकमरानों वरना कुर्सी सहित जलोगे".


इसके बाद कवि विश्वास ने लिखा, "क्या उन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार होगा जिन्होंने अपने बलात्कारी बेटों को दंडित करने की बजाय साथ खड़े होकर पीड़िता उन्नाव की बेटी को ज़िंदा जलाया?"

राजनेताओं पर निशाना साधते हुए कुमार बोले, "संसद में बैठे वोटों के ठेकादारों ने क़ानून न तब बनाया न अब बनाएंगे तो हमारी-आपकी सामाजिक ज़िम्मेदारी ज़्यादा बढ़ जाती है". इस मामले ने कवि विश्वास ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, "उन न्यायाधीश महोदय से कोई प्रश्न करेगा जिन्होंने पीड़िता की आशंका के बाद भी रेप के दबंग आरोपियों को बेल दी? उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाही होगी जिन्होंने इतने दिन तक उस लड़की की शिकायत को FIR में नहीं बदला? सत्ता-व्यवस्था के प्रति अविश्वास लोकतंत्र में भीषण अमंगलकारी है."

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बता दें कि पीड़िता को गुरुवार को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ से एयरलिफ़्ट कर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सफ़दरजंग अस्पताल में पीड़िता के लिए अलग आईसीयू बनाया गया था. जहां डॉक्टरों की एक टीम लगातार निगरानी कर रही थी. लेकिन आख़िरकार उसे बचाया नहीं जा सका.बता दें कि डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता ने देर रात 11 बजकर 40 मिनट पर आख़िरी सांस ली थी. बलात्कार के आरोपियों ने उसे ज़िदा जला दिया था. जिसमें वो 90 फ़ीसदी जल गई थी. पीड़िता के परिजनों का कहा है कि उसके आखिरी शब्द थे 'हमें बचा लीजिए'. पीड़िता के भाई ने बताया कि, 'उसके आखिरी शब्द थे कि भईया हमें बचा लीजिए. हमने कहा कि बहन हम बचाकर ले जाएंगे. लेकिन हम बचा नहीं पाए. जो दोषी हैं, उनको भी वहीं जाना है, जहां हमारी बहन पहुंच चुकी है. हमें सरकार से बस यही इंसाफ चाहिए.'



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