Coronavirus: यूपी के बाराबंकी में एक दिन में 95 पॉजिटिव केस आए, हड़कंप मच गया

Coronavirus: बाराबंकी ग्रीन जोन से रेड जोन में पहुंचा, 1100 गांवों में प्रवासियों पर नज़र रखने के लिए निगरानी समितियां बना दी गईं

Coronavirus: यूपी के बाराबंकी में एक दिन में 95 पॉजिटिव केस आए, हड़कंप मच गया

प्रतीकात्मक फोटो.

लखनऊ:

UP Coronavirus Update: यूपी में आए 16 लाख प्रवासी मज़दूरों से कोरोना का खतरा बहुत बढ़ गया है. बाराबंकी जिले में एक दिन में 95 कोरोना के मरीज़ मिले हैं. यह सभी या तो प्रवासी मज़दूर हैं या उनके सीधे संपर्क वाले. तीसरे लॉकडाउन तक बाराबंकी ग्रीन जोन में था. अब तक यहां 20000 प्रवासी मज़दूर आ चुके हैं. यहां के 1100 गांवों में इन पर नज़र रखने के लिए निगरानी समितियां बना दी गई हैं.

आशा बहू प्रवासी मज़दूरों को समझाती हैं कि ''गरम पानी किए सैनिटाइजर लगाएं..कोई समान, जैसे आप मोबाइल छूते हैं...बिना सैनिटाइजर किए किसी और को छूना नहीं है.. ध्यान पूरा रखना है. पूरे 23 दिन आपको घर से बाहर नहीं निकलना है. किसी के संपर्क में नहीं आना है.'' बाराबंकी के जिनौली गांव में शमसुद्दीन को आशा बहू ने कोरोना के खतरे के बारे में समझाया. इस गांव में घर-घर में लूम लगे हैं. शमसुद्दीन यहां के बुने स्टोल उदयपुर में फेरी लगाकर बेचते हैं.

हेल्थ वर्कर पवन कुमार ने बताया कि ''हम लोग फॉलोअप करते हैं तो बताते हैं कि अगर बाहर निकलेंगे तो आसपास से पता चलेगा कि बाहर निकले हैं. हम लोग उनको बताते हैं, समझाते हैं कि आप घर में रहेंगे तो आप सुरक्षित रहेंगे, आपके घर वाले सुरक्षित रहेंगे.''

बाराबंकी में अब तक 20000 प्रवासी मज़दूर आ चुके हैं. पूरे यूपी और बिहार में बाराबंकी से नेशनल हाईवे 28 से गुज़रकर मज़दूर जा रहे हैं. प्रवासी मज़दूरों की सैकड़ों टेस्ट रिपोर्टें अभी आना बाक़ी हैं.

बाराबंकी के डीएम आदेश प्रकाश सिंह ने कहा कि ''जो हमारे यहां दो दिनों की रिपोर्ट आई है, 15 और 16 मई की, 95 पॉजिटिव आए हैं. उसमें से हमारे 49 ऐसे लोग हैं जो बाहर प्रांतों से आए हैं, अहमदाबाद से, मुंबई से, सूरत से, पुणे से, जयपुर से, दिल्ली से.''

बाराबंकी के ग्रीन ज़ोन से सीधे रेड ज़ोन बन जाने से इलाके में दहशत है. तमाम हॉटस्पॉट बन गए हैं. उनके आसपास लोगों से बाहर न निकलने के लिए एनाउंसमेंट हो रहे हैं. 20000 प्रवासी मज़दूरों से होम क्वारेंटाइन का पालन करवाना पुलिस के लिए बड़ा चैलेंज है.

बाराबंकी के 1000 से ज़्यादा गांवों में हर गांव में एक आशा बहू आने वाले प्रवासी लोगों को बता रही हैं की उन्हें कैसे क्वारंटाइन में रहना है? कैसे खुद को बचना है? और संक्रमण से गांव और परिवार को बचाना है? लेकिन इस बात के लिए लोगों को खुद डिसिप्लिन अपनाना पड़ेगा. क्योंकि इतनी बड़ी आबादी के लिए हर शख्स के पीछे एक सरकारी कर्मचारी नहीं हो सकता है.

 
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