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यूपी होमगार्ड एसोसिएशन का आरोप, योगी आदित्यनाथ सरकार दे रही है धोखा

पहले वेतन बढ़ाया, फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दैनिक भुगतान में और वृद्धि कर दी, और फिर बजट का हवाला देकर ड्यूटी कम कर दीं

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यूपी होमगार्ड एसोसिएशन का आरोप, योगी आदित्यनाथ सरकार दे रही है धोखा

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. उत्तर प्रदेश होमगार्ड एसोसिएशन ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप
  2. जुलाई 2016 के बजाय दिसंबर 2016 से एरियर्स दे रही सरकार
  3. यूपी सरकार पर बजट के नाम पर धोखा देने का आरोप
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय की तरफ से 11 अक्टूबर 2019 को एक नोटिफिकेशन निकाला गया जिसमें लिखा था कि मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश लखनऊ की अध्यक्षता में 28 अगस्त 2019 को हुई मीटिंग में यह निर्णय किया गया है कि उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग में तैनात 25000 होम गार्डों की तैनाती खत्म कर दी जाती है. इसमें कहीं यह नहीं लिखा था कि होम गार्डों (UP Home Guards) की ड्यूटी ही कम की गई है. इस नोटिफिकेशन के कुछ घंटों के बाद उत्तर प्रदेश के मंत्री चेतन चौहान का एक बयान आया जिसमें उन्होंने कहा कि किसी को निकाला नहीं जाएगा, बजट की कमी को देखते हुए ड्यूटी कम हो सकती हैं.

इससे पहले 27 सितंबर को योगी आदत्यनाथ सरकार की तरफ से एक और नोटिफिकेशन आया था जिसमें 16519 होम गार्डों (UP Home Guards) की ड्यूटी कम की गई थी. इस नोटिफिकेशन में लिखा गया था कि "विभागीय बजट की समीक्षा करने पर पाया गया कि वर्तमान में उपलब्ध बजट के अनुसार 672 प्रतिदिन करने पर लगभग 35000 होम गार्ड स्वयंसेवकों को ही इस वित्तीय वर्ष के अवशेष माहों में तथा अक्टूबर 2019 से फरवरी 2020 तक कुल 5 माहों हेतु ड्यूटी पर लगाया जा सकता है. वर्तमान विभागीय आय-व्ययक से विभिन्न ड्यूटी पर नियोजित हो रहे होमगार्ड स्वयंसेवकों की संख्या 51575 में से बजट की कमी के कारण लगभग 32 प्रतिशत, कुल 16519 होमगार्ड स्वयंसेवकों की ड्यूटी कम की जा रही है." इस नोटिफिकेशन में यह भी लिखा गया कि उत्तर प्रदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को मानते हुए होमगार्ड की प्रतिदिन भत्ता 600 रुपये और महंगाई भत्ता 12 प्रतिशत के हिसाब से 72 रुपये यानी कुल-मिलाकर 672 रुपये देता है. दरअसल 30 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि होमगार्ड का भत्ता पुलिस कार्मिक के न्यूनतम वेतन के समान होना चाहिए जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने होमगार्ड का भत्ता बढ़ाकर 672 रुपये करने का ऐलान किया था. अब फिर बजट की कमी दिखाकर ड्यूटी कम कर दी गई है.


अब तक सरकार कुल मिलाकर 41519 ड्यूटी कम कर चुकी है. ड्यूटी कम होने से असर सभी होमगार्ड जवानों पर होगा. उत्तर प्रदेश के होमगार्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश द्विवेदी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर 90000 के करीब होम गार्ड (UP Home Guards) हैं. पहले रोज 80000 के करीब ड्यूटी मिलती थी अब यह कम होकर 38000 के करीब हो गई है. यानी अब 90 हज़ार होमगार्डों के बीच यह ड्यूटी रोटेशन के तहत बांटी जाएगी. यानी पहले जिन होमगार्डों को साल में 11 महीने के करीब काम मिलता था अब उन्हें तीन से चार महीने काम मिलेगा.  सात से आठ महीने यह लोग बेरोजगार बैठेंगे. अगर इन लोगों को पूरा काम मिलता तो एक होमगार्ड 11 महीने में प्रतिदिन 672 के हिसाब से कुल मिलाकर 221760 रुपया कमा सकता था. लेकिन अब ड्यूटी कम होने के बाद उसे तीन से चार महीने काम मिलेगा. इसके हिसाब से ज्यादा से ज्यादा साल में यह लोग 81000 के करीब कमा सकते हैं.

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मुकेश द्विवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आर्डर दिया है कि जुलाई 2016 से होमगार्ड को एरियर्स मिलना चाहिए जबकि उत्तर प्रदेश सरकार दिसंबर 2016 से एरियर्स देना चाहती है. यानी छह महीने का एरियर्स कम कर रही है. मुकेश द्विवेदी का कहना है कभी तनख्वाह मिलने से भी दो-तीन महीने लग जाते हैं लेकिन फिर भी होमगार्ड (UP Home Guards) काम करने के लिए तैयार है. इस बार जो 25000 लोगों की ड्यूटी कम की गई है, वो अतिरिक्त ड्यूटी के रूप में पुलिस विभाग में लगाए गए थे. पुलिस विभाग में जो कमी थी वो होमगार्ड के लोग पूरा कर रहे थे. अब पुलिस विभाग ने इनकी ड्यूटी खत्म कर दी है. मुकेश द्विवेदी ने कहा कि बजट के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार उनके साथ धोखा कर रही है. दीवाली से पहले सरकार लोगों को तोहफा देती है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार होमेगार्डों को घर में बैठा रही है.

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उत्तर प्रदेश होमगार्ड एसोसिएशन काफी दिनों से अपने दैनिक वेतन को लेकर संघर्ष कर रहा है. सन 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि पंजाब और हरियाणा में काम करने वाले होमगार्डों का वेतन पुलिस कांस्टेबल के वेतन के बराबर होना चाहिए. उसके बाद दिसंबर 2016 में उत्तर प्रदेश होमगार्ड एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पिटीशन दायर की थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश के होमगॉर्डों को पुलिस कांस्टेबल के बराबर वेतन मिलना चाहिए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने होमगार्ड एसोसिएशन के पक्ष में जजमेंट दिया. फिर उत्तर प्रदेश सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची. उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी. सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा था. सन 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकार बदल गई. बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने होमगॉर्डों का दैनिक वेतन 375 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया. पुराने केस में सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई 2019 को अपने आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश के होमगॉर्डों का वेतन पुलिस कार्मिक के न्यूनतम वेतन के बराबर हो. फिर उत्तर प्रदेश सरकार को होमगार्ड (UP Home Guards) का वेतन दैनिक 500 से बढ़ाकर 672 रुपये करने का निर्णय लिया. लेकिन अब बजट का कमी दिखाते हुए ड्यूटी कम कर दी.

मुकेश द्विवेदी का कहना है कि वे सरकार से बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश करेंगे. अगर सरकार नहीं मानी तो आंदोलन करेंगे. जरूरत पड़ने पर कोर्ट भी जाएंगे.

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