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कश्मीरियों के हाथ में पत्थर नहीं, हुनर देखना चाहता हूं : राजनाथ सिंह

‘‘सरकार ने कश्मीर के लिये एकीकृत समग्र रणनीति अपनायी है. इसमें सभी विकल्पों को अपनाया जा रहा है, किसी विकल्प को पृथक रूप में नहीं देखा जा सकता है.’’

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कश्मीरियों के हाथ में पत्थर नहीं, हुनर देखना चाहता हूं : राजनाथ सिंह

'सरकार ने कश्मीर के लिये एकीकृत समग्र रणनीति अपनायी है'

नई दिल्‍ली: गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में शांति के स्थायी प्रयासों को फलीभूत करने की रणनीति में स्थानीय लोगों की अग्रणी भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि ‘‘हम कश्मीरियों के हाथ में पत्थर नहीं बल्कि कुदरत ने उनके हाथों में जो हुनर दिया है उसे देश और राज्य के विकास में लगते देखना चाहते हैं.’’ सिंह ने मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में गृह मंत्रालय की उपलब्धियों का लेखाजोखा पेश करते हुये यह बात कही. उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर ही कश्मीर के बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के लिये राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बहाल करने में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से वहां भर्ती अभियान और अन्य रोजगारपरक कार्यक्रम शुरू किये गये हैं.

कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान के लिये सरकार द्वारा तैयार की गयी रणनीति में सैन्य और सियासी विकल्प अपनाने के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि ‘‘सरकार ने कश्मीर के लिये एकीकृत समग्र रणनीति अपनायी है. इसमें सभी विकल्पों को अपनाया जा रहा है, किसी विकल्प को पृथक रूप में नहीं देखा जा सकता है.’’ सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थायी तौर पर अमन चैन की बहाली के लिये सरकार ने एकीकृत और समग्र रणनीति अपनायी है. इसमें राज्य को आतंकवादी हिंसा से निजात दिलाने के लिये बातचीत और स्थानीय लोगों की भूमिका सुनिश्चित करने सहित सभी संभव विकल्प अपनाये जाएंगे.

सिंह ने सैन्य, सियासी और कूटनीतिक विकल्प सहित अन्य सभी तरीकों को अपनाये जाने का हवाला देते हुये कहा कि ‘‘कश्मीर में स्थायी शांति की रणनीति के बारे में मैंने सोच समझ कर ही बोला था. बहुत जल्द इसके परिणाम दिखेंगे और जो कुछ कश्मीर में चल रहा है वह अब लंबे समय तक नहीं चलेगा.’’ इस दिशा में उठाये जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने पर गृह मंत्री ने कहा कि ‘‘हम क्या करेंगे, बस देखते जाइये, हम जो भी करेंगे उससे समस्या का स्थायी समाधान होगा और कश्मीर के लोगों को साथ लेकर समाधान करेंगे.’’

इससे पहले गृहमंत्री ने गृह मंत्रालय के प्रमुख कार्यों और उपलब्धियों का जिक्र करते हुये कहा कि देश भर में सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना मंत्रालय की सबसे अहम जिम्मेदारी है. उन्होंने इसके मद्देनजर कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर और नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों सहित देश भर में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति में संतोषजनक सुधार होने का दावा करते हुये कहा कि अशांत इलाकों में भी स्थिति जल्द नियंत्रण में होगी. अपने दावे के पक्ष में सिंह ने दलील दी कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है. इसके बावजूद सरकार की लक्षित रणनीतिक कार्रवाई के बलबूते ही वैश्विक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस देश में पैर नहीं जमा सका.

उन्होंने कहा कि देशभर से आईएसआईएस के प्रति सहानुभूति रखने वाले 90 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सिंह ने बीते तीन सालों में देश में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिये किये गये प्रयासों को मंत्रालय की विशेष उपलब्धि बताते हुये कहा, ‘‘हमने पूरी जिम्मेदारी से देश को सुरक्षा मुहैया करवाने की पूरी-पूरी कोशिश की.’’ उन्होंने बताया कि आतंकी संगठनों की सूची में आईएसआईएस और अंसार उल अम्माह को शामिल किया गया है. सिंह के मुताबिक वर्ष 2011-2014 तक संप्रग सरकार के कार्यकाल के मुकाबले वर्ष 2014 से 2017 तक नक्सली हमलों में 25 फीसदी की कमी आई है.

उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के अंतिम तीन वर्षों की तुलना में राजग सरकार के तीन वषरें में नक्सली हमलों में होने वाली मौतों में 42 फीसदी की कमी देखी गई है. गृहमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष सितंबर में कश्मीर में नियंत्रण रेखा के उस पार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने के लिये सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बीते छह महीनों में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिशों में बीते वर्ष इसी अवधि की तुलना में 45 फीसदी की कमी आई है. सिंह ने कहा कि पिछले तीन सालों में गुरदासपुर और पठानकोट आतंकी हमले के बाद कोई बड़ा हमला नहीं हो सका. उन्होंने इसे सुरक्षाबलों की सजगता से मिली अहम कामयाबी बताते हुये कहा कि देश में सुरक्षा का माहौल बेहतर है. सिंह ने भरोसा दिलाया कि सरकार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को खत्म करेगी और जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करेगी.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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