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मध्यप्रदेश के 18 जिलों में भारी वर्षा होने की चेतावनी, जानिए- आपके शहर का हाल

राजस्थान में कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश हुई, राज्य के कई जिलों में अगले 24 घंटों में भारी वर्षा की चेतावनी

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मध्यप्रदेश के 18 जिलों में भारी वर्षा होने की चेतावनी, जानिए- आपके शहर का हाल

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. बाढ़ प्रभावित केरल में स्थिति सामान्य हुई
  2. केरल में मरने वालों की संख्या 104 पहुंची
  3. मध्यप्रदेश के पाटन में 24 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज
नई दिल्ली:

मध्यप्रदेश के 18 जिलों में शुक्रवार की सुबह तक अतिभारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है. राजस्थान के पूर्वी हिस्से में कुछ स्थानों पर पिछले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा राज्य के पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्रों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. शुक्रवार को कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. केरल में निर्बाध रूप से जारी बारिश के बाद सूरज के निकलने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में गुरुवार को कुछ राहत मिली और कई निचले इलाकों से पानी कम हो गया जिससे राज्य में स्थिति सामान्य होनी शुरू हो गई है. इस बीच प्रदेश में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 104 हो गई है जबकि 34 अन्य लापता हैं.

मध्यप्रदेश में भोपाल में मौसम विभाग के ड्यूटी अधिकारी आरआर त्रिपाठी ने बताया कि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शुक्रवार साढ़े आठ बजे तक मध्यप्रदेश के 18 जिलों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और कहीं-कहीं पर अतिभारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है.    उन्होंने कहा कि जिन 18 जिलों में अतिभारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है, उनमें आगर मालवा, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच, राजगढ़, सीहोर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुरकलां, मुरैना, धार, अलीराजपुर, झाबुआ एवं बड़वानी शामिल हैं.    


मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्वी संभागीय जिलों में मानसून सक्रिय तथा पश्चिमी संभागों के जिलों में प्रबल रहा. प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में अधिकांश स्थानों पर वर्षा हुई. पिछले 24 घंटों में मध्यप्रदेश के पाटन में सबसे अधिक 24 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि खुरई में 23 सेंटीमीटर, जबलपुर में 20 सेंटीमीटर, लटेरी एवं गंजबासोदा में 16-16 सेंटीमीटर, सारंगपुर, शुजालपुर, सिरोंज, कुरवाई एवं सीहोर में 14-14 सेंटीमीटर, ब्यावरा, भानपुर, आगर एवं रहली में 13-13 सेंटीमीटर तथा टोंकखुर्द, गुना, सोनकच्छ एवं गोटेगांव में 12-12 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. प्रदेश के अधिकांश हिस्से पिछले तीन दिनों से पहले से ही भारी बारिश की चपेट में हैं, जिसके कारण कई निचले रहवासी इलाके पहले से ही जलमग्न हो गए हैं. प्रदेश के कई बांध, तालाब एवं जलाशय लबालब हो गए हैं और इनसे गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है.

इसी बीच, मध्यप्रदेश जन संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता कमलेश रैकवार ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि मध्यप्रदेश के सबसे बड़े बांध इंदिरा सागर में बृहस्पतिवार को जलस्तर 260.40 मीटर तक पहुंच गया है, जो फुल लेवल से 1.73 मीटर कम है. इस बांध का फुल लेवल 262.13 मीटर है. खंडवा जिले में बने इस बांध की कुल क्षमता 8364 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भरने की है.

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राजस्थान में कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश
राजस्थान के पूर्वी हिस्से में कुछ स्थानों पर पिछले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा राज्य के पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्रों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. मौसम विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान झालावाड़ के डग में 21 सेंटीमीटर, कोटा के दीगोद में 19 सेंटीमीटर, बूंदी के पाटन में 19 सेटीमीटर, टोंक के वनस्थली में 16 सेंटीमीटर, बूंदी के तालेडा में 16 सेंटीमीटर, बूंदी में 15 सेंटीमीटर, कोटा के मंडाना में 15 सेंटीमीटर, कोटा में 15 सेंटीमीटर, बूंदी के नैनवा में 15 सेंटीमीटर, कोटा के लाडपुरा में 14 सेंटीमीटर, बूंदी के इंद्रगढ़ में 13 सेंटीमीटर, टोंक के निवाई में 12 सेंटीमीटर, सवाईमाधोपुर के खंडार में 12 सेंटीमीटर, और अनेक स्थानों पर 11 सेंटीमीटर से 8 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह से शाम तक डबोक में हवाई अड्डे पर 33.6 मिलीमीटर, कोटा में 22.2 मिलीमीटर, जोधपुर में 13.4 मिलीमीटर, जयपुर में 8.8 मिलीमीटर, अजमेर में 5.6 मिलीमीटर, चूरू में 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के दौरान राजस्थान के अजमेर, बांसवाडा, बांरा, भरतपुर, भीलवाडा, बूंदी, चित्तौडगढ, डूंगरपुर, झालावाड़,कोटा, प्रतापगढ़, राजसमंद, सिरोही, टोंक और उदयपुर में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है. वहीं अलवर, करौली, दौसा, धोलपुर, जयपुर, सवाईमाधोपुर, सीकर और पाली में भारी बारिश की संभावना जताई गई है.

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बाढ़ प्रभावित केरल में कुछ राहत, मरने वालों की संख्या 104 पहुंची
केरल में निर्बाध रूप से जारी बारिश के बाद सूरज के निकलने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में गुरुवार को कुछ राहत मिली और कई निचले इलाकों से पानी कम हो गया जिससे राज्य में स्थिति सामान्य होनी शुरू हो गई है. इस बीच प्रदेश में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 104 हो गई है जबकि 34 अन्य लापता है.

देश के इस दक्षिणी राज्य में बारिश की तेजी में कमी आई है और प्रदेश के सभी 14 जिलों में से किसी में भी ‘रेड अलर्ट' जारी नहीं किया गया है. मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के कन्नूर एवं कासरगोड़ जिले में गुरुवार को ‘आरेंज अलर्ट' जारी किया गया (इसका मतलब है कि कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है) जबकि इडुक्की, कन्नूर और कसारगोड में शुक्रवार के लिए ‘यलो अलर्ट' (तेज बारिश) जारी किया गया है.    

वायनाड के पुथुमाला एवं मलप्पुरम के कवलप्पारा में तलाश अभियान जारी है, जहां पिछले हफ्ते एक के बाद हुई भूस्खलन की कई घटनाओं के कारण दो गांव जमींदोज हो गए थे, जिनके बारे में यह माना जा रहा है कि वहां लोग जिंदा दफन हो गए थे. पुथुमाला में यह तुलनात्मक रूप से एक धूप वाला दिन था, जहां मिट्टी हटाने वाली मशीन और खोजी श्वान दस्ते को लापता लोगों को ढूंढने के लिए लगाया गया है. कवलप्परा में तलाश अभियान के लिए ड्रोन को लगाया गया है.    

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दोपहर तीन बजे तक सरकार की ओर से जारी अद्यतन रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 104 लोगों की मौत हो गई है.    गौरतलब है कि लोगों ने कई स्थानों पर अपने-अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया है. हालांकि 1,057 राहत शिविरों में अब भी 1,75,373 लोग शरण लिए हुए हैं.

उत्तरी मलप्पुरम जिले में गुरुवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 तक पहुंच गई है जो सबसे अधिक है. जिले में 28 लोग अब भी लापता हैं. इसके बाद कोझीकोड़ में 17 वायनाड में 12 जबकि कन्नूर और त्रिशूर में नौ नौ लोगों की मौत हुई है जबकि वायनाड में सात लोग लापता हैं. सरकार के आकंड़ों के अनुसार कुल 11 हजार 901 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं जबकि 1115 पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

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