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सुनंदा की मौत को प्राकृतिक बताने को कहा गया था : पोस्टमॉर्टम करने वाला डॉक्टर

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सुनंदा की मौत को प्राकृतिक बताने को कहा गया था : पोस्टमॉर्टम करने वाला डॉक्टर

सुनंदा पुष्कर की फाइल फोटो

नई दिल्ली: एम्स फोरेंसिक विभाग के अध्यक्ष पद से हटाए जाने की मांग का सामना कर रहे डॉ सुधीर गुप्ता ने सुनंदा पुष्कर की मौत पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बदलने के लिए संस्थान के निदेशक और कांग्रेस नेता शशि थरूर के बीच मिलीभगत होने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे एक पत्र में उन्होंने दावा किया है कि ऐसे कुछ ई-मेल हैं जो सुनंदा के पोस्टमार्टम पर डॉ एमसी मिश्रा और थरूर के बीच मिलीभगत होना जाहिर करते हैं। नड्डा एम्स के अध्यक्ष भी हैं।

सुनंदा पिछले साल जनवरी में दिल्ली के एक होटल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई थी।

गुप्ता ने 28 मई की तारीख वाले अपने पत्र में कहा है, 'मुझसे डॉ मिश्रा ने दिवंगत सुनंदा पुष्कर की प्राकृतिक मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने को कहा था, जो निष्कर्षों के उलट था।'

हालांकि गुप्ता ने कहा कि वह दबाव के आगे नहीं झुके और एक ईमानदार अधिकारी के रूप में तथ्यात्मक रिपोर्ट दी। मिश्रा ने गुप्ता के आरोपों पर मीडिया के सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

डॉ गुप्ता का डॉ आदर्श कुमार ने समर्थन किया जो उस 'बोर्ड ऑफ डॉक्टर्स' के सदस्य हैं जिसने पोस्टमार्टम किया था।

उन्होंने कहा है कि जब हम दबाव के आगे नहीं झुके तब पोस्टमार्टम के निष्कर्षों के उलट मौत को स्वाभाविक बताने को कहा गया था।

हालांकि एम्स ने आरोपों को खारिज कर दिया। संस्थान स्पष्ट रूप से कहना चाहेगा कि प्रो. सुधीर गुप्ता पर किसी मामले के लिए उनकी मेडिकल राय के सिलसिले में कभी कोई बाहरी दबाव नहीं डाला गया। एम्स ने एक बयान में कहा है, 'इस सिलसिले में मीडिया में प्रो. गुप्ता द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और इनसे इनकार किया जाता है।'

एम्स के प्रवक्ता डॉ अमित गुप्ता ने भी इस बात का जिक्र किया कि डॉ गुप्ता को फोरेंसिक विभाग के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में संस्थान ने उपयुक्त प्रक्रियाओं का पालन किया है।

उन्होंने पिछली संप्रग सरकार की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सुनंदा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

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एम्स ने डॉ डीएन भारद्वाज को फोरेंसिक मेडिसिन एंड टोक्सीयोलॉजी विभाग का नया अध्यक्ष नियुक्त करने की अदालत से इजाजत मांगी है।

गौरतलब है कि 25 मार्च को अदालत ने निर्देश दिया था कि गुप्ता की जगह किसी और को नियुक्त करने के लिए संस्थान को उसकी इजाजत लेनी होगी।


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