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इमारतों को ध्वस्त करने वाला बम इस्तेमाल करना चाहिए था, बालाकोट हमले पर बोले वायुसेना प्रमुख

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा का कहना है कि अगर हमें मालूम होता कि पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी ठिकाने पर किए गए हवाई हमले का 'प्रोपैगंडा' होगा, तो भारतीय विमानों के ज़रिये ऐसे बम गिराए जाते, जिनसे पूरा ढांचा ही ध्वस्त हो गया होता.

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इमारतों को ध्वस्त करने वाला बम इस्तेमाल करना चाहिए था, बालाकोट हमले पर बोले वायुसेना प्रमुख

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा

खास बातें

  1. पाक ने दावा किया था कि भारतीय लड़ाकू विमान निशाना चूक गए थे
  2. भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा - हमारा संदेश साफ-साफ पहुंचा
  3. 'हम सैटेलाइटों के भरोसे थे, और तभी बादल घिर आए... होता है...'
नई दिल्ली:

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा का कहना है कि अगर हमें मालूम होता कि पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी ठिकाने पर किए गए हवाई हमले का 'प्रोपैगंडा' होगा, तो भारतीय विमानों के ज़रिये ऐसे बम गिराए जाते, जिनसे पूरा ढांचा ही ध्वस्त हो गया होता.

भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने इसी साल 26 फरवरी को जम्मू एवं कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) को पार कर पूर्वोत्तर पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी कैम्प पर इस्राइल-निर्मित स्पाइस 2000 बम का पेनेट्रेटर वर्शन गिराया था. यह हथियार इमारतों को भेदते हुए इंसानी निशानों को ही खत्म करता है, और इसके इस्तेमाल से यह ज़रूरी नहीं होता कि पूरी इमारत ध्वस्त होगी.

कारगिल युद्ध में भारत की जीत की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर NDTV से बातचीत में एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा ने कहा, "दूरदृष्टि से सोचने पर, अगर आप प्रोपैगंडा वॉर पर नज़र डालें, तो लगता है, हमें दूसरा स्पाइस बम गिराना चाहिए था, जो पूरी इमारत को ध्वस्त कर डालता..."


दरअसल, वीडियो या तस्वीरों की सूरत में सबूत नहीं होने की वजह से भारतीय वायुसेना को दिक्कत का सामना करना पड़ा था, विशेषकर तब, जब अगले ही दिन जैश कैम्प की प्राइवेट सैटेलाइट से खींची गई तस्वीरें जारी हो गईं, जिनमें इमारत का ढांचा कतई सुरक्षित नज़र आ रहा था, और बम से हुए नुकसान के बेहद मामूली चिह्न दिखे.

एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा ने हवाई हमले के बाद सामने आई दिक्कतों के बारे में बताते हुए साफ-साफ कहा कि भारतीय सैटेलाइटों से हवाई हमले के असर की तस्वीरें ली गई होतीं, तो मदद मिलती. उन्होंने बताया, "हम सैटेलाइटों के भरोसे थे, और तभी बादल घिर आए... होता है... यह जंग है... चीज़ें हमेशा योजना के मुताबिक ही नहीं होतीं... हम गए ही यह सोचकर थे कि हमें आतंकवादियों को मारना है... हम इमारतें ध्वस्त करने के लिए गए ही नहीं थे..."

चूंकि अपने सैटेलाइट से कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं थी, इसलिए भारतीय वायुसेना को एक मित्र साझीदार देश द्वारा उपलब्ध करवाई गई हाई-रिसॉल्यूशन सैटलाइट तस्वीरों पर भरोसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इन तस्वीरों में, जिनमें से एक तस्वीर NDTV को दिखाई गई, साफ देखा जा सकता है कि वायुसेना जिन इमारतों पर हमला करने का दावा कर रही है, उनमें से एक में तीन जगह बम से हमले के निशान हैं. बहरहाल, गोपनीयता की शर्त की वजह से वायुसेना उन तस्वीरों को प्रकाशित नहीं कर सकी.

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भारतीय वायुसेना और भारत सरकार मज़बूती से दावा करती रही हैं कि जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर हवाई हमला कामयाब रहा था, जो जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर किए गए आतंकवादी हमले के जवाब में किया गया था. दूसरी ओर, पाकिस्तान ने दावा किया था कि हवाई हमले में भारतीय लड़ाकू विमान निशाना चूक गए थे.

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोवा ने कहा, "यह हमला जैश-ए-मोहम्मद को यह बताने के लिए किया गया था कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम कहां हो - जैसे इस केस में वे पाकिस्तान में थे - हम वहीं आकर तुम्हें दबोचेंगे... हमारा संदेश साफ-साफ पहुंचा - जैश-ए-मोहम्मद तक भी, और पाकिस्तान सरकार तक भी..."



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