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कमजोर मॉनसून के चलते 55 लाख हेक्‍टेयर तक घटी खरीफ फसलों की बुवाई

इस बार 8 जुलाई तक यूपी, झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश औसत से काफी कम हुई है. इसका असर सीधे बुवाई पर पड़ा है.

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कमजोर मॉनसून के चलते 55 लाख हेक्‍टेयर तक घटी खरीफ फसलों की बुवाई

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्‍ली:

मुंबई भले ही बारिश से बेहाल हो गयी हो, कई इलाकों में ये आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गयी हो, लेकिन देश के कई राज्यों में कमज़ोर मॉनसून सरकार के लिए सिरदर्द बनता दिख रहा है. इस बार 8 जुलाई तक यूपी, झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश औसत से काफी कम हुई है. इसका असर सीधे बुवाई पर पड़ा है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल 6 जुलाई तक खरीफ फसलों की बुवाई 55 लाख हेक्टेयर तक घट गयी है यानी करीब 15% तक की गिरावट. 6 जुलाई तक धान की बुवाई पिछले साल के 79.08 लाख हेक्टेयर से घटकर 67.25 लाख हेक्टेयर रह गयी (-15%) जबकि दलहन फसलों की बुवाई 41.67 लाख हेक्टेयर से घटकर 33.60 लाख हेक्टेयर रह गयी करीब 20% कर की गिरावट.

कृषि राज्य मंत्री गजेंन्द्र शेखावत और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि चिंता की कोई बात नहीं है, मॉनसून अगले 15 दिन में फिर ज़ोर पकड़ सकता है. हालांकि मौसम विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद शर्मा ने एनडीटीवी से कहा कि क्रॉप वेदर फोरकास्टिंग ग्रुप की बैठक में कमज़ोर मॉनसून पाने वाले राज्यों को अब इस स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू करने को कहा गया है.


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कमज़ोर मॉनसून वाले राज्यों - जैसे उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को हिदायत दी गयी है वो फसलों की आपदा योजना तैयार करना शुरू करें. उन्हें साफ हिदायत दी गयी है कि सूखे में टिकने वाली धान की फसलें जैसे IR-64 का किसान ज़्यादा इस्तेमाल करें. सबसे ज़्यादा कमी उत्तर प्रदेश (-46%), गुजरात (-44%), झारखंड (-34%) और ओडीशा (-28%) में रिकॉर्ड की गयी है.

कृषि विकास केंद्र जैसे संस्थानों को कहा गया है कि वो किसानों को एडवाइज़री जारी करें. कम पानी वाली फसलें जैसे धान की IR 64 वैराइटी, सोयाबीन और मूंग की बुआई पर किसान ज़्यादा ध्यान दें. फिलहाल मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून की हालात में सुधार हो सकता है. मौसम विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद शर्मा ने एनडीटीवी से कहा कि 10 जुलाई से फिर हालात में तेज़ी से सुधार हो सकता है क्योंकि मॉनसून के फिर से ज़ोर पकड़ने की उम्मीद है. लेकिन हालात अगर नहीं सुधरे तो संकट बढ़ सकता है.



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