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62 साल की महिला 13 घंटे तक उफनती लहरों में लड़ती रही, फिर आया एक 'मसीहा'

पूर्वी बर्धमान जिले के कालीबाजार निवासी ताप्ती देवी चौधरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं.

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62 साल की महिला 13 घंटे तक उफनती लहरों में लड़ती रही, फिर आया एक 'मसीहा'

13 घंटे पानी में रहने के बाद भी जिंदा बची महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है. प्रतीकात्मक तस्वीर

पूर्वी बर्धमान: 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय...' यह बात एक बार फिर से पूर्वी बर्धमान में सच साबित हुई है. 62 साल की ताप्ती देवी कभी तैराक नहीं रही हैं, पर जिंदगी जीतने के लिए वह 13 घंटे तक नदी में तैरती रहीं. घटना पश्चिम बंगाल के बाढ़ प्रभावित पूर्वी बर्धमान जिले की है. यहां उफनती दामोदर नदी में ताप्ती बह गईं थीं. इसके बाद वह जान बचाने के लिए 80 किलोमीटर तक तैरती रहीं. हुगली जिले में पहुंचने पर कुछ मछुआरों की उन पर नजर पड़ी तो उन्होंने बाहर निकाला. इस दौरान उनकी सांस चल रही थी. फिलहाल ताप्ती स्वस्थ हैं. 

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पूर्वी बर्धमान जिले के कालीबाजार निवासी ताप्ती देवी चौधरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं. वह शनिवार शाम को कौतूहल के चलते दामोदर नदी के उफान को देखने गई थीं. इसी दौरान घाट पर उनका पैर फिसला गया और वह पानी में चली गईं. ताप्ती ने मदद के लिए काफी आवाज लगाई, पर आसपास कोई नहीं था. शाम होने के कारण अंधेरा भी हो रहा था. पहले तो उन्होंने बचने के लिए हाथ पैर मारना शुरू किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. 

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दामोदर नदी में बहाव भी काफी तेज था, इसलिए नदी की धारा के खिलाफ तैरना आसान नहीं था. काफी जद्दोजहद के बाद जब ताप्ती को कोई उम्मीद नहीं नजर आई तो उन्होंने खुद को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया. बहाव के साथ तैरना शुरू कर दिया. इस दौरान नदी में बह रही एक लकड़ी उन्हें मिल गई. जिसे उन्होंने अपना सहारा बना लिया. 

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इस लकड़ी को पकड़कर ताप्ती रातभर नदी में तैरती रहीं. बीच-बीच में आवाज भी लगाती रहीं कि शायद कोई आवाज सुनकर बचा ले, पर पूरी रात कोई नहीं मिला. इसी बीच वह दामोदर से जुड़ने वाली मुंडश्वरी नदी में चली गईं. रविवार सुबह साढ़े सात बजे के आसपास हुगली जिले के पुरसुरा में मारकुंडा घाट के पास कुछ मछुआरों ने ताप्ती को देखा. 

उन्होंने ताप्ती को बाहर निकाला, तब तक वह होश में थीं. मछुआरों ने बताया कि वह मुंडश्वरी नदी में हैं, जो पूर्वी बर्धमान से करीब 80 किलोमीटर दूर है. मछुआरों ने उन्हें पास के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. लेकिन वे अभी भी दहशत में हैं. ताप्ती का कहना है कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि वह कैसे अब तक जिंदा हैं. 

इनपुट: भाषा
 


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