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आखिर क्या हैं किसानों की मांगें और क्या कहा सरकार ने? जानिए...

हजारों किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा पर धरने पर बैठे, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र शेखावत पहुंचे

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आखिर क्या हैं किसानों की मांगें और क्या कहा सरकार ने? जानिए...

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र शेखावत ने किसानों को संबोधित किया.

खास बातें

  1. गजेंद्र शेखावत ने किसानों को बहुत से आश्वासन दिए
  2. किसानों की ज़्यादातर मांगें सरकार द्वारा मान लिए जाने का दावा
  3. मंत्री के भाषण के बावजूद किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हुए
नई दिल्ली:

दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर मंगलवार को हजारों किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों के साथ धरने पर बैठे रहे. हालांकि इस दौरान केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र शेखावत इस आंदोलन को खत्म करवाने के लिए आए और उन्होंने किसानों को बहुत से आश्वासन भी दिए और दावा किया कि किसानों की ज़्यादातर मांगें सरकार मान रही है. लेकिन लगभग 15 मिनट के केंद्रीय मंत्री के भाषण के बावजूद किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हुए.

आइए देखें कि आखिर किसानों की क्या मांगे हैं? और सरकार क्या आश्वासन दे रही है? क्या वाकई सरकार किसानों की मांगें मान रही है या फिर किसान जबरन आंदोलन पर अड़े हुए हैं.

पहली मांग- न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक दर्जा देते हुए देश के किसानों की सभी फसलों का (फल, सब्जियां व दूध) वैधानिक उचित और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य डॉ स्वामीनाथन द्वारा सुझाए गए ब2 फार्मूले के अनुसार, कृषि विश्वविद्यालय की वास्तविक लागत के आधार पर तय किया जाए व उस पर कम से कम 50% लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य घोषित किया जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मंडी में गुणवत्ता मापदंड के उत्पादन का भाव किसी भी कीमत पर समर्थन मूल्य से कम न हो. ऐसा न होने पर दंड का प्रावधान किया जाए. सभी फसलों की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की गारंटी दी जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- किसान को उसकी फसल का 50 फीसदी लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए और मोदी जी ने इसकी शुरुआत कर दी थी. खरीफ की फसल पर लागू कर दिया था और जैसे खरीफ का लागू किया है उसी हिसाब से रबी का भी अगले तीन दिन में लागू कराने की जिम्मेदारी लेता हूं. एमएसपी पर फसल खरीदने में ढिलाई बरती जाती है इसलिए राज्य सरकारों को केंद्र सरकार की तरफ से एडवाइजरी जारी करवा दूंगा कि किसानों की फसल को खरीदने के लिए सुनिश्चित किया जाए और किसान को उचित दाम मिलना चाहिए. अभी खरीद एक महीने तक हो रही है लेकिन किसान यूनियन की मांग के बाद आदेश जारी किया जाएगा कि खरीद तीन महीने तक की जाएगी.


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दूसरी मांग -देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किए जाएं. देश के किसानों पर लगभग 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है. देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज (राष्ट्रीयकृत बैंक/सहकारी बैंक/साहूकार) एक ही समय में बिना किसी समय सीमा के भारत सरकर के माध्यम से माफ किए जाएं. किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अन्तर्गत आने वाले बजट सत्र में चार वर्ष तक केवल ब्याज जमा करने व पांचवे वर्ष में नवीनीकरण के समय मूलधन ब्याज सहित जमा कराने का प्रावधान किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- मेरी अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है और मैं किसानों के प्रतिनिधि के नाते उस समिति में बैठूंगा. सारे किसान प्रतिनिधियों से उसमें चर्चा करूंगा और इसका रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे. अगले तीन महीने में इसका निस्तारण करने की कोशिश करेंगे.

तीसरी मांग- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल इंजन को (एंटिक कारों के आधार पर) मुक्त किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी और किसानों की लड़ाई लड़ेगी

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चौथी मांग- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कम्पनियों को लाभ मिल रहा है. योजना में बदलाव करते हुए प्रत्येक किसान को इकाई मानकर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए. योजना में बदलाव करते हुए चोरी, आगजनी आदि को शामिल किया जाए. प्रीमियम का पूर्ण भुगतान सरकारों द्वारा किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- जो कंपनियां किसानों का भुगतान करने में समय लगाती हैं उनके लिए हमने सात दिन का समय निर्धारित कर दिया है. सात दिन के बाद अगर एक भी दिन की देरी हुई तो किसान को 12 फ़ीसदी के हिसाब से ब्याज भी देंगी बीमा कंपनियां. फसल बीमा के ऊपर बाकी जो सुझाव हैं वह आपके नेताओं के साथ चर्चा करेंगे और कमेटी में विचार करके सुझाव देंगे और लागू करेंगे.

पांचवी मांग-  किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए. लघु एवं सीमान्त किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कुछ नहीं कहा

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छठी मांग- देश में आवारा पशुओं जैसे-नीलघोड़ा, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को पूर्णतः नष्ट कर दिया जाता है. इससे देश की खाद्य सुरक्षा व खेती दोनों खतरे में हैं. जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहद कार्य योजना बनाई जाए. देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- इसको बीमा में कवर किया जाना चाहिए इसके लिए हमने पहले ही कानून बना दिया है कि देश के हर राज्य में इस खास फसल के समय एक पायलट प्रोजेक्ट करके इसको कैसे लागू करना है, इसकी जांच कर लेंगे. जैसा नतीजा आएगा उसके हिसाब से देश भर में लागू कर देंगे.

सातवीं मांग- किसानों का बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाए. चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलो तय किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कुछ नहीं कहा

आठवीं मांग- किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप की बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए.

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नौवीं मांग - पिछले 10 वर्षों में खेती में हो रहे नुकसान के कारण सरकारी रिकार्ड के अनुसार तीन लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है. यह विषय पूरे देश के लिए शर्मनाक है. यह सिलसिला आज भी रुक नहीं पा रहा है. आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों का पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.

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दसवीं मांग- मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह मुख्यमंत्रियों की एक कमेटी बनाई है जो किसान के काम खेती के साथ NREGA को जोड़ने पर बात कर रही है. राजनाथ सिंह जी की तरफ से मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि उस कमेटी के अंदर किसानों का भी एक प्रतिनिधि रहेगा और इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करेगा.

ग्यारहवीं मांग- खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा- अगली जीएसटी काउंसिल में इस मुद्दे को रखवाएंगे और किसान के हित में जो होगा ज्यादा से ज्यादा उसे करवाने की कोशिश करेंगे.

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बारहवीं मांग- कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाए. मुक्त व्यापार समझौतों में कृषि पर चर्चा न की जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कुछ नहीं कहा

तेरहवीं मांग- देश में पर्याप्त मात्रा में पैदावार वाली फसलों का आयात बंद किया जाए. आसियान मुक्त व्यापार समझौते की आड़ में कई देशों द्वारा ऐसी वस्तुओं का निर्यात किया जा रहा है जिसका वह उत्पादक नहीं है. ऐसे मामलों में प्रतिबंध लगाया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कहा - जो भी चीज हिंदुस्तान में पर्याप्त पैदा होती है उसका आयात किसी भी सूरत में न हो, सरकार इसको पूरी तरह से सुनिश्चित करेगी.

चौदहवीं मांग- देश में सभी मामलों में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 से ही किया जाए. भूमि अधिग्रहण को केन्द्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोधी कानून बनाने से रोका जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कुछ नहीं कहा

VIDEO : दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर डटे किसान

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पंद्रहवीं मांग
- किसानों की समस्याओं पर संसद का विशेष संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाए. इसमें एक माह तक किसानों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान किया जाए.

गजेंद्र शेखावत ने कुछ नहीं कहा



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