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Exclusive: जो HAL राफेल डील से हुई बाहर, अमेरिका, इजरायल, फ्रांस सहित कई देशों की कंपनियां हैं उसकी कस्टमर

राफेल डील से बाहर होने पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(HAL) चर्चा में है. जानिए इस कंपनी का इतिहास और ट्रैक रिकॉर्ड.

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Exclusive: जो HAL राफेल डील से हुई बाहर, अमेरिका, इजरायल, फ्रांस सहित कई देशों की कंपनियां हैं उसकी कस्टमर

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(एचएएल) के प्रोजेक्ट का मुआयना करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फाइल फोटो).

खास बातें

  1. हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स ने कई शानदार हेलीकॉप्टर बनाए हैं
  2. सुखोई विमान ने वर्ष 1997 में पहली बार में पहली बार उड़ान भरी
  3. एचएएल को लीजेंड पीएसयू का अवार्ड भी मिल चुका है
नई दिल्ली:

राफेल डील से बाहर होने पर सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(HAL) सुर्खियों में है. कहा जा रहा है कि कुछ क्षमताओं की कमी के चलते यह कंपनी इस बड़ी डील से बाहर हो गई. अगर कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो मालुम पड़ता है कि यह वह कंपनी है, जिसने भारतीय सेना को स्वदेश में बने विमानों में उड़ान भरने के लायक बनाया. पिछले 77 साल का इतिहास देखें तो एचएएल ने एक से बढ़कर एक कीर्तिमान स्थापित किए हैं. रक्षा क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले अमेरिका, फ्रांस, इजरायल जैसे  दो दर्जन देशों की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनियों को भी अपना ग्राहक बनाने वाली इस सरकारी कंपनी को अब तक शानदार काम के चलते 30 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं. देश की नवरत्न कंपनियों में शुमार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को लीजेंड पीएसयू(सार्वजनिक उपक्रम) का भी तमगा मिल चुका है.  कंपनी ने गुणवत्ता की बदौलत 30 से अधिक देशों में निर्यात करने में सफलता हासिल की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक एचएएल  ने करीब 77 वर्षों के सफर में तीन हजार से भी अधिक विमानों का निर्माण,  3400 से अधिक विमान-इंजनों और 2600 से अधिक इंजनों की मरम्मत की है. इस वक्त आइआइटी मद्रास से एमटेक किए आर माधवन बतौर डायरेक्टर कंपनी का चार्ज संभाल रहे हैं.

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भारत में बने विमान, सेठ ने बनाई थी कंपनी
बात 23 दिसंबर 1940 की है. जब उस वक्त देश के माने-जाने उद्ममी वालचन्द हीराचन्द को लगा क्यों न ऐसी कंपनी बनाई जाए, जिससे भारत में ही जहाज बनने लगे. इसी सोच के साथ उन्होंने चार करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ मैसूर की तत्कालीन सरकार के सहयोग से 23 दिसंबर 1940 को कंपनी की नींव डाली. 1941 में भारत सरकार ने एक तिहाई शेयर खरीद लिया. और 1942 में पूरा मैनेजमेट अपने हाथ में ले लिया. फिर अमेरिका की इंटर कॉन्टीनेंटल एयरक्राफ्ट कंपनी के सहयोग से देश की यह कंपनी हॉक फाइटर और बॉम्बर एयरक्राफ्ट बनाने लगी. 1945 में यह कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड सप्लाई और फिर जनवरी 1951 में इसे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अधीन कर दिया गया. अगस्त 1951 में एचटी-2 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को डिजाइन कर कंपनी ने निर्माण किया. अपने निर्देशन में बने इस विमान को पहली बार डॉ. वीएम घटगे ने उड़ाने में सफलता हासिल की. इसके बाद कंपनी ने करीब डेढ़ सौ ट्रेनर एयरक्राफ्ट बनाकर एयरफोर्स को सप्लाई किए गए. फिर टू सीटर पुष्पक, कृषक, जेट फाइटर मारुत और जेट ट्रेनर किरन नामक एयरक्राफ्ट इस कंपनी ने बनाए. इस बीच अगस्त 1963 में मिग 21 बनाने के लिए एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड(एआइएल) अस्तित्व में आई. जून 1964 में सरकार ने हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को  Aeronautics India Limited के साथ मिला दिया. इस प्रकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का जन्म हुआ.  यह विलय एक अक्टूबर 1964 को हुआ. फिर इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का नाम मिला. कंपनी का मुख्य काम प्लेन की डिजाइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयरिंग और एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर के इंजन की मरम्मत करने का है. 

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एचएएल की मूल कंपनी के संस्थापक रहे उद्ममी वालचंद हीराचंद(फाइल फोटो).

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बनाए कमाल के हेलीकॉप्टर
हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स ने कई शानदार हेलीकॉप्टर बनाए हैं, जो भारतीय वायुसेना के लिए काफी उपयोगी हैं. इसमे ध्रुव हैलीकॉप्टर भारत का एक बहूद्देशीय हैलीकॉप्टर है. इजरायल जैसा देश भी इस विमान को भारत से खरीद चुका है.  वहीं एचएएल रुद्र (HAL Rudra) एचएएल ध्रुव का एक सशस्त्र संस्करण है.इसी तरह एचएएल ने तेजस नामक लड़ाकू विमान बनाया. दिसंबर 2009 में  गोवा समुद्र स्तरीय उड़ान परीक्षण के दौरान, तेजस ने 1,350 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उडा़न भरी. यह देश में बना पहला सुपरसॉनिक लड़ाकू विमान है.

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इन एयरक्राफ्ट्स और हेलीकॉप्टर का कर चुकी है निर्माण
1 9 70 में एचएएल ने मैसर्स एसएनआईएएस के साथ मिलकर चेतक और चीता नामक हेलीकॉप्टर्स के निर्माण के  लिए बेंगलुरु में विशेष यूनिट खोली. कंपनी सूत्रों के मुताबिक एचएल अब तक 31 प्रकार के एयरक्राफ्ट बना चुकी है, जिसमें 17 स्वदेशी डिजाइन के एयरक्राफ्ट हैं.जिसमें सुखोई ३० एमकेआई भारतीय वायुसेना का अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान है. एचएएल ने इस विमान को रूस के सैन्य विमान निर्माता  सुखोई के सहयोग से बनाया है. खास बात है कि इस सुखोई सीरीज के सुखोई 30-एमकेके तथा एमके 2 जैसे विमानों को चीन और इंडोनेशिया को बेचा जा चुका है. वहीं एमकेएम, एमकेवी संस्करणों को मलेशिया, वेनेजुएला तथा अल्जीरिया ने खरीदा है.

सुखोई विमान ने वर्ष 1997 में पहली बार  में पहली बार उड़ान भरी और 2002 में इसे इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किया गया.  वर्ष 2004 से सुखोई विमानों का निर्माण   भारत में ही हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। यह चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. जो मिग विमानों का स्थान ले रहा. इस वक्त यह सरकारी कंपनी  सुखोई SU-30 MKI , ध्रुव Dhruv-ALH , चेतक-चीता हेलीकॉप्टर का प्रोडक्शन कर रही है. जगुआर और मिग की रिपेयरिंग का भी काम चल रहा है.  खास बात है कि यह सरकारी कंपनी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाने में एयरोस्पेस डिवीजन के जरिए मदद कर रही. सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल की दिशा में भी कंपनी काम कर रही है. एचएएल लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर बनाने पर विशेष जोर है.  अपने सभी प्रोजेक्ट्स को तय समय-सीमा में पूरा करने के लिए कंपनी ने बेंगलुरु, हैदराबाद, नासिक, कानपुर, लखनऊ, कोरापत, कोरवा सहित कुल 11 रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर स्थापित कर रखे हैं.

बनाए इंटरनेशन कस्टमर
एचएएल ने अपनी खूबियों के दम पर अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की एक जमात तैयार की है.  दो दर्जन से अधिक देशों को प्लेन से जुड़ी साजो-सामग्रा निर्यात करने वाली इस कंपनी के एयरबस इंडस्ट्रीज फ्रांस, बोईंग यूएसए, कोस्ट गार्ड मारीशस, ELTA, Israel, इजराइल एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रर्ीज, Ruag, Germanyस , Rosoboronexport, Russia , Turbomeca, France , Rolls Royce Plc, UK , Honeywell International, USA आदि ग्राहक हैं.

मिले कई अवार्ड
एचएएल को कई अवार्ड मिल चुके हैं. अंतर्राष्ट्रीय सूचना एवं विपणन केन्द्र ने मेसर्स ग्लोबल रेटिंग, यूके के संयोजन में मेसर्स हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड को 2003 में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में इंटरनेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया था. इसके अलावा  कंपनी को 2013 में देश की नवरत्न कंपनियों में से इसको लीजेंड पीएसयू का अवार्ड मिल चुका है. कंपनी को रिसर्च एंड डिजाइन, टेक्नॉलजी, मैनेजेरियल, एक्सपोर्ट्स, एनर्जी, क्वालिटी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय से लेकर राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं. 2015-16 में  एक्सीलेंस परफार्मस पर 2007-08, 2009-10, 2010-11स 2012-13 और 2015-16 में रक्षा मंत्रालय की ओर से रक्षा मंत्री अवार्ड मिल चुका है एक्सीलेंस इन परफारमेंस में. 

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